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	<title>OpenBook Blog</title>
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	<description>Invoicing, Billing, Banking, Accounting &#38; GST</description>
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		<title>जूट उद्यमी योजना क्या है और इसका लाभ किसे और कैसे मिल सकता है?</title>
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		<pubDate>Thu, 05 May 2022 06:28:13 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Coir Udyami Yojana]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय अर्थव्यवस्था में हमेशा से जूट उद्योग का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। विभाजन से पहले जूट उद्योग में भारत का एकाधिकार था। उस समय कच्चा जूट भारत से स्कॉटलैंड भेजा जाता था, जहां जूट के प्रोडक्ट जैसे टाट और बोरियां बनाकर विश्व के अलग-अलग देशों में भेजा जाता था। वर्तमान में भी जूट से बने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-weight: 400;">भारतीय अर्थव्यवस्था में हमेशा से जूट उद्योग का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। विभाजन से पहले जूट उद्योग में भारत का एकाधिकार था। उस समय कच्चा जूट भारत से स्कॉटलैंड भेजा जाता था, जहां जूट के प्रोडक्ट जैसे टाट और बोरियां बनाकर विश्व के अलग-अलग देशों में भेजा जाता था। वर्तमान में भी जूट से बने प्रोडक्ट की मांग पूरी दुनिया में होती है,क्योंकि भारत का जूट सबसे बेहतर क्वालिटी का है। यही वजह है कि भारत में जूट को &#8220;सोने का रेशा&#8221; यानी &#8220;गोल्ड फ़ाइबर&#8221; कहा जाता है। भारत में जूट उद्योग का इतिहास काफ़ी पुराना है। देश में जूट का पहला कारख़ाना 1859 में स्कॉटलैंड के व्यापारी जॉर्ज ऑकलैंड ने बंगाल में श्रीरामपुर के पास स्थापित किया था। धीरे-धीरे जूट उद्योग का विकास हुआ और 1939 में जूट कारख़ानों की संख्या बढ़कर 105 हो गई।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">विभाजन से पहले भारत में जूट के कुल 112 कारख़ाने थे, लेकिन विभाजन के समय 10 कारख़ाने पाकिस्तान को दे दिए गए। जिससे भारत में जूट उद्योग के विकास पर प्रभाव पड़ा। 1949 में भारतीय रूपये के अवमूल्यन (Devaluation) की वजह से भारतीय कारख़ानों के लिए पाकिस्तान का कच्चा जूट बहुत महंगा हो गया। पाकिस्तान ने इसका बहुत लाभ उठाया, लेकिन भारत सरकार ने जल्द ही इस समस्या का समाधान कर लिया। उसके बाद से भारत सरकार जूट उद्योग को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर अलग-अलग योजनाएं शुरू करती रही है। जूट उद्यमी योजना (Coir Udyami Yojana-CUY), उनमें से ही एक योजना है, जिसकी शुरुआत जूट उद्योग को बढ़ावा देने के लिए की गई है। इस ब्लॉग में हम बताएंगे कि जूट उद्यमी योजना क्या है एवं इसका लाभ किसे और कैसे मिल सकता है?</span></p>
<h3><b>जूट उद्यमी योजना क्या है?</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">कुछ समय पहले तक देश में प्लास्टिक की मांग काफ़ी थी, जिससे प्लास्टिक उद्योग काफ़ी बढ़ गया। जिसका बुरा असर जूट उद्योग पर बहुत ज़्यादा पड़ा। जूट उद्योग को संकट से निकालने के लिए भारत सरकार ने जूट उद्यमी योजना की शुरुआत की। यह एक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना है। इस योजना के तहत भारत सरकार की तरफ़ से उद्योग शुरू करके उसे आगे बढ़ाने के लिए जूट निर्माण इकाइयों के उद्यमियों को 10 लाख रूपये की आर्थिक मदद दी जाती है। जूट उद्यमी योजना एडवांस और लोन का मिल-जुला रूप है। इस योजना के तहत जूट संबंधित नया बिज़नेस शुरू करने के अलावा उसे आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक मदद मिलती है। इस योजना का लाभ लेने के लिए जूट प्रोडक्ट का बिज़नेस करने वाले व्यक्ति को शुरुआत में थोड़ी पूंजी इन्वेस्ट करना होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जूट निर्माण यूनिट स्थापित करने के इच्छुक लोग स्टार्ट-अप के तौर पर जूट मैनुफैक्चरिंग यूनिट भी शुरु कर सकते हैं।</span></p>
<h3><b>जूट उद्यमी योजना की विशेषताएं:</b></h3>
<ol>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">इस योजना के तहत पहले से स्थापित या नए जूट मैनुफैक्चरिंग यूनिट को शुरू करने के लिए सब्सिडी और बिज़नेस लोन मिलता है। प्रोजेक्ट की लागत 10 लाख रूपये तक होनी चाहिए, तभी लोन पास हो सकता है।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">प्रोजेक्ट में वर्किंग कैपिटल की कुल लागत 25% से अधिक नहीं होना चाहिए।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">जूट उद्यमी योजना के तहत प्रति प्रोजेक्ट 10 लाख रूपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है, लेकिन कुल लागत का 5% हिस्सा उद्यमी/कारोबारी को खुद वहन करना पड़ता है।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">जूट उद्यमी, प्रोजेक्ट के लिए सरकार की तरफ़ से 40% की सब्सिडी का लाभ ले सकता है।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">इस योजना के तहत जूट उद्यमी को प्रोजेक्ट की लागत का 55% लोन के तहत मिल सकता है।</span></li>
</ol>
<h3><b>जूट उद्यमी योजना का लाभ कौन-कौन ले सकता है?</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">जूट उद्यमी योजना (Coir Udyami Yojana- CUY) का लाभ 18 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति ले सकता है, जो जूट फ़ाइबर, यार्न और इनसे बने प्रोडक्ट का बिज़नेस करता हो या करना चाहता हो। इस योजना के तहत एक व्यक्ति के साथ ही एक संगठन भी बिज़नेस लोन के लिए आवेदन कर सकता है। आइए विस्तार से जानें जूट उद्यमी योजना के तहत कौन-कौन लोन के लिए आवेदन कर सकता है-</span></p>
<ul>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">कंपनी</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">एक व्यक्ति</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">गैर सरकारी संगठन (NGO)</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">स्वयं सहायता समूह</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">रजिस्टर्ड सोसायटी</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">उत्पादन सहकारी समिति और धर्मार्थ ट्रस्ट</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">संयुक्त लायबिलिटी समूह</span></li>
</ul>
<p><span style="font-weight: 400;">हालांकि, अगर कोई व्यक्ति या संस्था इससे पहले केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य योजना के तहत सब्सिडी का लाभ ले चुका है, तो वह जूट उद्यमी योजना (CUY) के तहत मिलने वाले लोन का लाभ नहीं ले सकता है।</span></p>
<h3><b>जूट उद्यमी योजना के तहत लोन का लाभ लेने के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स:</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">इस योजना के तहत लोन का आवेदन करने के लिए निम्न डॉक्यूमेंट्स की आवश्यकता होती है-</span></p>
<ul>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">पहचान प्रमाण पत्र</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">निवास प्रमाण पत्र</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">मकान का नक़्शा और उसके मालिकाना हक़ की कॉपी, जिसमें जूट उद्योग चल रहा है या खोलने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा अगर मकान किराए पर लिया गया है, तो मकान मालिक द्वारा मिला हुआ NOC आवश्यक होगा।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">आरक्षित श्रेणी का लाभ लेने के लिए तहसीलदार/SDM या समकक्ष अधिकारी द्वारा जारी किया गया जाति प्रमाण पत्र।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">अगर कोई व्यक्ति अकेले आवेदन कर रहा है, तो केवल एक फ़ॉर्म चाहिए। लेकिन, संगठन के रूप में आवेदन करते समय संगठन के उपनियमों की प्रमाणित कॉपी लगाना अनिवार्य है।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">बिज़नेस संबंधी खर्चों का पूरा लेखा-जोखा देना होगा। जैसे- बिज़नेस में अब तक कितना खर्च हो चुका है, कितना होने वाला है, किन-किन चीजों पर खर्च किया गया है या किन चीजों पर खर्च किया जाएगा आदि।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">अगर व्यक्ति किसी जूट उद्योग में पहले काम कर चुका है, तो उसका अनुभव प्रमाण पत्र देना होगा।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">उद्यमिता विकास कार्यक्रम (Entrepreneurship Development Programme) का ट्रेनिंग सर्टिफिकेट।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र।</span></li>
</ul>
<h3><b>जूट उद्यमी योजना का लाभ पाने के लिए कैसे करें आवेदन?</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">इस योजना का लाभ पाने के लिए उद्यमी/संगठन ऑफ़लाइन और ऑनलाइन दोनों ही तरह से आवेदन कर सकते हैं, जिनके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है-</span></p>
<h4><b>ऑफ़लाइन आवेदन प्रक्रिया:</b></h4>
<ol>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">जूट उद्यमी योजना का लाभ पाने के लिए ऑफ़लाइन आवेदन करने वाले व्यक्ति को जूट बोर्ड कार्यालय, ज़िला औद्योगिक केंद्र, जूट प्रोजेक्ट कार्यालय, पंचायती राज विभाग या जूट बोर्ड द्वारा नामित किए गए कार्यालय में जाना होगा।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">इनमें से किसी एक जगह से आवेदन फ़ॉर्म लेकर उसमें सभी जानकारी सही-सही भरें।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स की फ़ोटो कॉपी लगाकर फ़ॉर्म जमा कर दें।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">फ़ॉर्म मिलने के बाद जानकारी और डॉक्यूमेंट्स की जांच की जाएगी और सब कुछ सही होने पर आवेदन पत्र स्वीकार कर लिया जाएगा।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">कुछ दिनों बाद योजना का लाभ आवेदनकर्ता को अपने आप मिल जाएगा।</span></li>
</ol>
<h4><b>ऑनलाइन प्रक्रिया:</b></h4>
<ol>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">इस योजना का लाभ पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वालों को सबसे पहले जूट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट </span><a href="http://coirservices.gov.in/frm_login.aspx" rel="nofollow noopener" target="_blank"><span style="font-weight: 400;">http://coirservices.gov.in/frm_login.aspx</span></a><span style="font-weight: 400;"> पर लॉगिन करना होगा।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">वेबसाइट पर पहले बॉक्स में ही आपको &#8216;Coir Udyami Yojana&#8217; का ऑप्शन दिखाई देगा। वहां &#8216;Apply&#8217; पर क्लिक करें।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">अगर आप पहली बार इस योजना के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो &#8216;New Login Registration&#8217; पर क्लिक करें।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">इसके बाद आपके सामने एक रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म खुलेगा, वहां मांगी गई सभी जानकारी भरें और &#8216;Confirm&#8217; पर क्लिक करें।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">आगे मांगी गई अन्य जानकारी भरकर सभी ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स की PDF फाइल अपलोड करें और फ़ॉर्म सबमिट कर दें। इतना करते ही आपका ऑनलाइन आवेदन पूरा हो जाएगा।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">जानकारी वेरिफ़ाई करने के बाद अगर सब कुछ सही हुआ, तो आपको इस योजना का लाभ मिल जाएगा।</span></li>
</ol>
<h3><b>जूट के बिज़नेस में OpenBook कैसे कर सकता है आपकी मदद:</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;"><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=co.openbook&amp;referrer=utm_source%3Dopenbook.co%26utm_medium%3Dbuttons" rel="nofollow noopener" target="_blank">OpenBook</a> को ख़ासतौर पर हर तरह के स्मॉल बिज़नेस यानी MSMEs की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। जूट का बिज़नेस भी इसी श्रेणी में आता है, इसलिए OpenBook जूट के प्रोडक्शन और मैनुफैक्चरिंग संबंधी बिज़नेस के लिए बहुत उपयोगी है। आप जूट के उत्पाद ख़रीदकर छोटे स्तर पर बेचें या उन्हें बनाएं दोनों के लिए बैंकिंग, अकाउंटिंग और बिलिंग बहुत ज़रूरी होती है। OpenBook से ये तीनों ज़रूरतें बड़ी आसानी से पूरी की जा सकती हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आपकी जानकारी के लिए बता दें कि <a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=co.openbook&amp;referrer=utm_source%3Dopenbook.co%26utm_medium%3Dbuttons" rel="nofollow noopener" target="_blank">OpenBook</a> पर लॉगिन करते ही मुफ़्त में ज़ीरो बैलेंस डिजिटल बिज़नेस बैंक अकाउंट मिलता है, जिससे बिज़नेस की बैंकिंग संबंधी ज़रूरतें जैसे पेमेंट कलेक्शन और ट्रांसफ़र को आसानी से मैनेज़ किया जा सकता है। साथ ही इसके <a href="https://blog.openbook.co/hi/atriaone-%e0%a4%a1%e0%a5%87%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a5%87/">AtriaOne डेबिट कार्ड</a> से बिज़नेस संबंधी खर्चों जैसे मकान का किराया, बिजली बिल की पेमेंट, कर्मचारियों की सैलरी, इंटरनेट और फ़ोन बिल जैसे खर्चों को भी मैनेज़ किया जा सकता है। इसके अलावा पेमेंट मिलने पर वह अकाउंटिंग से ऑटोमैच भी हो जाती है। पेमेंट न मिलने पर ग्राहकों को रिमाइंडर्स भेज सकते हैं। केवल यही नहीं <a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=co.openbook&amp;referrer=utm_source%3Dopenbook.co%26utm_medium%3Dbuttons" rel="nofollow noopener" target="_blank">OpenBook</a> से आप अपने वेंडर को पर्चेज़ बिल एवं पर्चेज़ रिटर्न और ग्राहकों को सेल्स इनवॉस, सेल्स रिटर्न और एस्टीमेट्स बनाकर उनके मोबाइल पर व्हाट्सऐप, SMS या ईमेल द्वारा भेज सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस तरह हम कह सकते हैं कि जूट उद्यमी योजना देश में जूट उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया एक बेहतरीन कदम है। इसका लाभ 18 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति ले सकता है और जूट के बिज़नेस को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे सकता है। साथ ही अपने बिज़नेस को OpenBook की मदद से मैनेज़ करके उसे आगे बढ़ाकर काफ़ी लाभ भी कमा सकता है।</span></p>
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		<title>5 फ़ूड बिज़नेस आइडिया, जिनसे कर सकते हैं लाखों की कमाई!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[OpenBook]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Apr 2022 11:17:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MSME]]></category>
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					<description><![CDATA[वर्तमान में भारत स्मॉल बिज़नेस और स्टार्ट-अप के मामले में दुनिया का सबसे तेज़ी से आगे बढ़ने वाला देश बन गया है। यहां हर दिन नए-नए स्मॉल बिज़नेस और स्टार्ट-अप खुल रहे हैं। आज के आर्थिक युग में शायद ही ऐसा कोई काम होगा, जो बिना पैसों के किया जा सकता है। ऐसे में हर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-weight: 400;">वर्तमान में भारत स्मॉल बिज़नेस और स्टार्ट-अप के मामले में दुनिया का सबसे तेज़ी से आगे बढ़ने वाला देश बन गया है। यहां हर दिन नए-नए स्मॉल बिज़नेस और स्टार्ट-अप खुल रहे हैं। आज के आर्थिक युग में शायद ही ऐसा कोई काम होगा, जो बिना पैसों के किया जा सकता है। ऐसे में हर कोई पैसे कमाने की कोशिश में लगा रहता है और यह अच्छा भी है। इससे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति तो सुधरती ही है, साथ ही साथ देश की अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होती है। अगर स्मॉल बिज़नेस यानी छोटे व्यवसाय की बात करें, तो शहर हो या गांव हर जगह इन्हें देखा जा सकता है। दोनों ही जगहों पर कई तरह के स्मॉल बिज़नेस देखे जा सकते हैं। फ़ूड बिज़नेस भी उन्ही स्मॉल बिज़नेस में से एक है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">फ़ूड बिज़नेस यानी खाने वाली किसी भी चीज़ का निर्माण, उत्पादन या उन्हें ख़रीद कर बेचने से है। खाना एक ऐसी चीज़ है, जिसके बिना कोई भी इंसान जीवित नहीं रह सकता है। ऐसे में इस बिज़नेस की मांग हमेशा ही बनी रहेगी। हालांकि, समय-समय पर इसके रूप बदलते रहते हैं। भारत में स्वादिष्ट खाना बनाकर प्यार से खिलाने का चालान सदियों से चला आ रहा है। आज फ़ूड से संबंधित कई तरह के बिज़नेस उपलब्ध हैं, जिन्हें करके लाखों-करोड़ों की कमाई की जा सकती है। आज के इस ब्लॉग में हम आपको फ़ूड से जुड़े 5 ऐसे ही बिज़नेस के बारे में बताएंगे, जिन्हें करके कोई भी आसानी से लाखों की कमाई कर सकता है। इसके बारे में जानने के लिए इस ब्लॉग को अंत तक ज़रूर पढ़ें।</span></p>
<h3><b>फ़ूड संबंधित 5 बेहतरीन बिज़नेस आइडिया:</b></h3>
<ul>
<li style="padding-bottom: 16px;"><b>देशी ढाबा:</b><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;"> भारत में देशी ढाबे का फ़ूड बिज़नेस काफ़ी समय से किया जा रहा है, लेकिन आज तक इसका क्रेज़ कम नहीं हुआ है। आज भी लोगों को जब स्वादिष्ट देशी खाने का आनंद लेना होता है, वो ढाबे पर ही जाना पसंद करते हैं। अक्सर आपने देखा होगा कि शहरों में रहने वाले ज़्यादातर लोग जब शहर की भीड़-भाड़ और रेस्टोरेंट के खाने से थक जाते हैं, तो शहर से बाहर जाकर किसी अच्छे ढाबे पर खाना खाते हैं। </span></span><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;">ऐसे में अगर आपको स्वादिष्ट खाना बनाकर खिलाने का शौक़ है, तो आप देशी ढाबे का बिज़नेस शुरू कर सकते/सकती हैं। इसकी सबसे ख़ास बात यह है कि आपको इस बिज़नेस में बहुत ज़्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़ते हैं, जबकि कमाई बहुत ज़्यादा होती है। अगर आप किसी अच्छी जगह पर देशी ढाबा खोलते/खोलती हैं, तो आराम से एक महीने में 50 हज़ार से लेकर 1 लाख रूपये तक की कमाई कर सकते/सकती हैं।</span></span></span></span></span></span></span></li>
<li style="padding-bottom: 16px;"><b>फ़ूड ट्रक:</b> वर्तमान में फ़ूड ट्रक का बिज़नेस सबसे फ़ायदे का फ़ूड बिज़नेस है। आजकल लगभग हर शहर में जगह-जगह पर फ़ूड ट्रक देखे जा सकते हैं। इसकी सबसे ख़ास बात यह है कि इसके लिए किसी निश्चित जगह की ज़रूरत नहीं पड़ती है। ग्राहक और मांग के हिसाब से फ़ूड ट्रक को एक जगह से दूसरे जगह ले जाया जा सकता है। फ़ूड ट्रक में लगभग हर तरह के फ़ूड बेचे जा सकते हैं, लेकिन ज़्यादातर फ़ूड ट्रक में फ़ास्ट फ़ूड ही बेचा जाता है। ऐसे में अगर आप फ़ूड से जुड़ा कोई नया बिज़नेस शुरू करने की योजना बना रहे/रही हैं, तो आप अपने तरीक़े से फ़ूड ट्रक का बिज़नेस शुरू कर सकते/सकती हैं। आप अपने फ़ूड ट्रक के साथ नए एक्सपेरिमेंट्स करके अपने ग्राहकों को आकर्षित कर सकते/सकती हैं। इससे आपके ग्राहक बढ़ेंगे, आपका फ़ायदा बढ़ेगा और एक्सपेरिमेंट्स की वजह से शायद आप प्रसिद्ध भी हो जाएं। फ़ूड ट्रक के बिज़नेस में भी आराम से महीने के 1-2 लाख रूपये कमाए जा सकते हैं। हालांकि, जगह और बिक्री के हिसाब से यह संख्या कम या ज़्यादा भी हो सकती है।</li>
<li style="padding-bottom: 16px;"><b>केटरिंग सर्विस:</b> अगर आपके पास स्वादिष्ट खाना बनाने का हुनर और अच्छी मैनेज़मेंट स्किल है, तो केटरिंग सर्विस का बिज़नेस आपके लिए ही है। शहर हो या गांव, शादी-ब्याह या अन्य किसी फ़ंक्शन के समय केटरिंग की आवश्यकता पड़ती ही है। ऐसे में इसकी मांग हर जगह और हर समय बनी रहेगी। इसलिए अगर आप फ़ूड से संबंधित कोई बिज़नेस शुरू करना चाहते/चाहती हैं, तो केटरिंग सर्विस के बारे में सोच सकते/सकती हैं। केटरिंग सर्विस के बिज़नेस की सबसे ख़ास बात यह है कि इसे कम लागत में भी शुरू किया जा सकता है। यानी किसी फ़ंक्शन में खाने का ठेका लेकर आप खाना बनाने वालों और सामान को क्रेडिट पर ले सकते/सकती हैं, और पेमेंट मिलने पर आप सबकी पेमेंट कर सकते/सकती हैं। इस तरह बहुत कम लागत के साथ आप बहुत ज़्यादा फ़ायदा कमा सकते/सकती हैं। केटरिंग के बिज़नेस में भी आराम से 1-2 लाख रूपये महीने कमाए जा सकते हैं। हालांकि, अगर आप बड़े स्तर पर केटरिंग सर्विस शुरू करते/करती हैं, तो आप 10-20 लाख रूपये महीने की भी कमाई कर सकते/सकती हैं।</li>
<li style="padding-bottom: 16px;"><b>बेकरी बिज़नेस:</b> बेकरी बिज़नेस यानी केक, बिस्कुट, कुकीज़, रस्क आदि से है। पहले गांव या अन्य किसी छोटी जगह पर केक बहुत कम देखने को मिलता था, लेकिन आजकल गांवों और छोटी से छोटी जगहों पर भी जगह-जगह पर केक बिकने लगे हैं। इसलिए हम कह सकते हैं कि बेकरी प्रोडक्ट्स की मांग दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। एक अच्छे केक या स्पेशल कुकीज़ के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं और मुंहमांगी क़ीमत देने को तैयार रहते रहते हैं। ऐसे में अगर आपको बेकिंग का शौक़ है और उसे अपना बिज़नेस बनाना चाहते/चाहती हैं, तो यह सही मौका है। आज बाज़ार में तरह-तरह के केक मिलते हैं। आप सामान्य केक और कुकीज़ के साथ ही अपने कुछ स्पेशल केक और कुकीज़ भी बेच सकते/सकती हैं। अगर लोगों को आपका एक्सपेरिमेंट पसंद आया, तो आपका बिज़नेस रातों-रात कई गुना बढ़ जाएगा और आप देखते-देखते करोड़पति भी बन सकते/सकती हैं। हालांकि, सामान्य रूप से इस बिज़नेस में 50 हज़ार से लेकर 1 लाख रूपये महीने तक आराम से कमाए जा सकते हैं। इसलिए बिना देर किए अपने बेकिंग के शौक़ को अपना बिज़नेस बना डालिए।</li>
<li style="padding-bottom: 16px;"><b>टिफ़िन सर्विस:</b> वर्तमान में कुछ शहरों में टिफ़िन सर्विस बहुत ज़्यादा सफल बिज़नेस है। ज़्यादातर लोग नौकरी के चक्कर में घर से बाहर किसी दूसरे शहर में रहते हैं। कुछ लोग खुद खाना बनाते हैं, तो कुछ लोग खाना बनाने वालों को रखकर अपना काम चलाते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो ये दोनों ही नहीं करते हैं और बाहर जाकर खाना खाते हैं। वैसे लोगों के लिए टिफ़िन सर्विस एक अच्छा विकल्प है। अगर आप घर जैसे स्वादिष्ट खाने की टिफ़िन सर्विस शुरू करते/करती हैं, तो यकीनन उसकी मांग बहुत ज़्यादा होगी। शहरों में रहने वाले लोग घर के बने स्वादिष्ट खाने के लिए कोई भी क़ीमत देने को तैयार रहते हैं। ऐसे में आप अपनी टिफ़िन सर्विस शुरू करके पैम्पलेट के माध्यम से उसका प्रचार कर सकते/सकती हैं और काफ़ी मुनाफ़ा कमा सकते/सकती हैं। टिफ़िन सर्विस के बिज़नेस में भी आराम से 50 हज़ार से लेकर 1 लाख रूपये महीने तक कमाए जा सकते हैं।</li>
</ul>
<h3><b>OpenBook फ़ूड बिज़नेस में कैसे कर सकता है मदद:</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">बिज़नेस फ़ूड का हो या जूट का, सबके लिए बैंकिंग, बिलिंग और अकाउंटिंग ज़रूरी होती है। और बिज़नेस की ये सारी ज़रूरतें <a href="https://openbook.co/hindi" rel="nofollow noopener" target="_blank">OpenBook</a> एक जगह पूरा करता है। यह मुफ़्त में ज़ीरो बैलेंस डिजिटल बिज़नेस बैंक अकाउंट देता है, जिससे ग्राहकों से पेमेंट कलेक्शन और वेंडर की पेमेंट आसानी से की जा सकती है। साथ ही इसके AtriaOne डेबिट कार्ड से दुकान/ऑफ़िस का किराया, कर्मचारियों की सैलरी, बिजली बिल, फोन बिल या किसी सब्सक्रिप्शन की पेमेंट आसानी से की जा सकती है। इस तरह यह बिज़नेस बैंकिंग की लगभग हर ज़रूरत को पूरा करता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">केवल यही नहीं, <a href="https://blog.openbook.co/hi/openbook-%e0%a4%8f%e0%a4%95-app-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%bf/">OpenBook से पेमेंट लिंक के साथ डिजिटल बिल</a> बनाकर आसानी से ग्राहकों के मोबाइल पर भेज सकते हैं। वहीं, जब कोई ग्राहक समय पर पेमेंट न दे, तो उसे पेमेंट रिमाइंडर भी भेज सकते हैं। इस तरह आपको पेमेंट के लिए बार-बार ग्राहकों को फोन भी नहीं करना पड़ता है। इसके अलावा जैसे ही किसी बिल की पेमेंट मिलती है, वह अकाउंटिंग से ऑटो-मैच भी हो जाती है। इस तरह आप मैनुअली बिज़नेस चलाने में लगने वाले समय और पैसे को बचाकर अपने बिज़नेस में लगा सकते हैं और बिज़नेस को आगे बढ़ा सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">ऊपर हमने पांच फ़ूड बिज़नेस आइडिया के बारे में बताया है। आप अपनी पसंद के हिसाब से उनमें से कोई एक बिज़नेस शुरू करके लाखों की कमाई कर सकते हैं। ये सारे बिज़नेस ऐसे हैं, जिनकी मांग हमेशा बनी रहने वाली है। इसके साथ ही अपने फ़ूड बिज़नेस को आसानी से चलाने और मुनाफ़ा कमाने के लिए एक बार <a href="https://bit.ly/3hm9NiW" rel="nofollow noopener" target="_blank">OpenBook ऐप</a> ज़रूर इस्तेमाल करें।</span></p>
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		<title>वर्किंग कैपिटल क्या होता है और यह किसी भी बिज़नेस के लिए क्यों ज़रूरी है?</title>
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		<pubDate>Tue, 15 Feb 2022 06:44:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पूंजी यानी कैपिटल (Capital) हर बिज़नेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। बिज़नेस छोटा हो या बड़ा, पर्याप्त कैपिटल के बिना उसे लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता है। बिज़नेस बिना रुकावट के लंबे समय तक चले और लाभ कमाता रहे, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में कैपिटल की व्यवस्था करना ज़रूरी होता है। कई [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-weight: 400;">पूंजी यानी कैपिटल (Capital) हर बिज़नेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। बिज़नेस छोटा हो या बड़ा, पर्याप्त कैपिटल के बिना उसे लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता है। बिज़नेस बिना रुकावट के लंबे समय तक चले और लाभ कमाता रहे, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में कैपिटल की व्यवस्था करना ज़रूरी होता है। कई लोग कैपिटल की कमी होने पर बिज़नेस लोन लेते हैं और अपने बिज़नेस को आगे बढ़ाते हैं। ऐसे में आज हम इस ब्लॉग में वर्किंग कैपिटल क्या होता है और यह किसी भी बिज़नेस के लिए क्यों ज़रूरी है, इसके बारे में विस्तार से बताएंगे। इसके बारे में जानने के लिए ब्लॉग को अंत तक ज़रूर पढ़ें।</span></p>
<h3><b>वर्किंग कैपिटल क्या होता है?</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">कार्यशील पूंजी यानी वर्किंग कैपिटल (Working capital)  उस कैपिटल को कहते हैं, जो बिज़नेस के दैनिक कार्यों के लिए ज़रूरी होता है। आसान शब्दों में कहें तो बिज़नेस को सही तरीक़े से बिना किसी रुकावट के लगातार चलाने के लिए जिस कैपिटल की आवश्यकता होती है, उसे ही वर्किंग कैपिटल कहा जाता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">किसी भी बिज़नेस के दैनिक कार्य या ख़र्चों में माल ख़रीदने में लगने वाला खर्च, कर्मचारियों की सैलरी, दुकान या ऑफ़िस का किराया, बिजली या फोन बिल आदि शामिल होता है। रोज़ाना इन ख़र्चों को मैनेज़ करने के लिए वर्किंग कैपिटल की आवश्यकता होती है। इन ख़र्चों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इन्ही की वजह से बिज़नेस चलता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि वर्किंग कैपिटल हर बिज़नेस की बैकबोन यानी रीढ़ होती है। </span></p>
<h3><b>वर्किंग कैपिटल के प्रकार:</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">वर्किंग कैपिटल मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है, जिसके बारे में नीचे बताया गया है-</span></p>
<ol>
<li><b>पर्मानेंट वर्किंग कैपिटल: </b>किसी व्यक्ति द्वारा इनवॉइस या संपत्ति (Asset) को कैश में बदलने से पहले ही लायबिलिटीज़ की पेमेंट्स करने के लिए जिस कैपिटल की आवश्यकता होती है, उसे स्थायी कार्यशील पूंजी यानी पर्मानेंट वर्किंग कैपिटल (Permanent working capital) कहते हैं। इस तरह के वर्किंग कैपिटल को ऑपरेटिंग साइकल के रूप में भी जाना जाता है। अधिकांश बिज़नेस को इस अंतर को भरने के लिए पर्मानेंट या चल रहे सॉल्यूशन की आवश्यकता होती है। इसे निश्चित वर्किंग कैपिटल के रूप में भी जाना जाता है। यह बिज़नेस को सही तरीक़े से चलाने के लिए आवश्यक न्यूनतम वर्किंग कैपिटल होता है।</li>
<li><b>वेरिएबल वर्किंग कैपिटल: </b>इस तरह के वर्किंग कैपिटल को किसी विशेष बिज़नेस में अस्थायी अवधि (Temporary period) के लिए इन्वेस्टमेंट के रूप में जाना जाता है। यही वजह है कि इसे उतार-चढ़ाव वाला वर्किंग कैपिटल भी कहा जाता है। जब भी बिज़नेस के आकार या बिज़नेस संपत्ति के आकार में कोई परिवर्तन होता है, उस समय यह कैपिटल भी बदल जाता है। वेरिएबल वर्किंग कैपिटल को दो अन्य कैटेगरी में बांटा गया है, जो निम्न हैं-
<ul>
<li><b>सीजनल वेरिएबल वर्किंग कैपिटल:</b><span style="font-weight: 400;"> यह वर्किंग कैपिटल किसी विशेष वर्ष के सबसे व्यस्त मौसम के लिए ज़रूरी होता है। कई बार बिज़नेस को अपने वर्किंग कैपिटल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लोन भी लेना पड़ सकता है। ऐसे समय में सीजनल वेरिएबल वर्किंग कैपिटल मदद करता है। यह कैपिटल सीजनल बिज़नेस की आवश्यकताओं को पूरा करता है, इसलिए इसे सीजनल वेरिएबल वर्किंग कैपिटल कहा जाता है।</span></li>
<li><b>स्पेशल वेरिएबल वर्किंग कैपिटल:</b><span style="font-weight: 400;"> किसी भी बिज़नेस में अनहोनी की स्थिति या असाधारण संचालन (Exceptional operations) के लिए इस तरह के वर्किंग कैपिटल की आवश्यकता हो सकती है। ये वो फंड होता है, जो प्राकृतिक आपदाओं या आग से होने वाली दुर्घटना के समय बिज़नेस के नुक़सान की भरपाई करने में काम आता है।<br />
</span></li>
</ul>
</li>
<li><b>रेगुलर वर्किंग कैपिटल: </b>किसी विशेष बिज़नेस द्वारा अपने बिज़नेस ऑपरेशन्स को फंड देने के लिए यानी बिज़नेस अच्छे से चलाने के लिए जिस न्यूनतम कैपिटल की आवश्यकता होती है, उसे रेगुलर वर्किंग कैपिटल कहते हैं। इसमें संसाधनों के लिए मज़दूरी, सैलरी या अन्य ऊपरी ख़र्चों की पेमेंट्स को शामिल किया जाता है।</li>
<li><b>ग्रॉस वर्किंग कैपिटल: </b>किसी भी बिज़नेस की वर्तमान संपत्ति में इन्वेस्ट किए गए कुल फंड अमाउंट को सकल कार्यशील पूंजी यानी ग्रॉस वर्किंग कैपिटल कहते हैं। इसमें शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट, मार्केटेबल सेक्योरिटीज़, इन्वेंटरी, अकाउंट्स रिसीवेबल और कैश शामिल होता है। किसी विशेष बिज़नेस की ऑपरेशनल कार्यक्षमता के बारे में अच्छे से जानने के लिए ग्रॉस वर्किंग कैपिटल में वर्तमान परिसंपत्तियों (Current assets) की वर्तमान देनदारियों (Current liabilities) से तुलना करनी पड़ती है।</li>
</ol>
<h3><b>बिज़नेस में वर्किंग कैपिटल का क्या महत्व है?</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है, वर्किंग कैपिटल किसी भी बिज़नेस की दैनिक आवश्यकताओं और कार्यों को सही से मैनेज़ करने के लिए आवश्यक होता है, ताकि बिज़नेस बिना किसी परेशानी के निरंतर चलता रहे। इससे स्पष्ट होता है कि हर तरह के छोटे-बड़े बिज़नेस के लिए वर्किंग कैपिटल बहुत ही आवश्यक है। एक अनुभवी व्यापारी वर्किंग कैपिटल के महत्व को अच्छे से समझता है और इस बात का ध्यान रखता है कि उसके बिज़नेस में कभी भी वर्किंग कैपिटल की कमी न होने पाए। कई बार बिज़नेस में वर्किंग कैपिटल की कमी होने पर व्यापारी बिज़नेस लोन के अंतर्गत वर्किंग कैपिटल लोन भी लेते हैं, ताकि वो अपने बिज़नेस को बिना रुकावट के चला सकें।</span></p>
<h3><b>वर्किंग कैपिटल की कमी से बिज़नेस को क्या नुक़सान होता है?</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">वर्किंग कैपिटल की कमी होने पर माल की ख़रीदारी, कर्मचारियों की सैलरी, दुकान या ऑफ़िस का किराया, बिज़नेस में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की मरम्मत, बिजली और फोन बिल की पेमेंट नहीं हो पाती है। ये सभी चीजें हर बिज़नेस के लिए बहुत ज़रूरी होती हैं। अगर समय पर इनकी पूर्ति नहीं हो पाती है, तो बिज़नेस के संचालन में रुकावट आती है और धीरे-धीरे बिज़नेस मुसीबत में फ़ंस जाता है। कर्मचारियों की सैलरी न देने पर धीरे-धीरे कर्मचारी छोड़कर चले जाते हैं, जिससे बिज़नेस की उत्पादकता (Productivity) पर असर पड़ता है। ज़्यादा दिनों तक ऐसी स्थिति होने पर बिज़नेस को बंद भी करना पड़ सकता है।</span></p>
<h3><b>वर्किंग कैपिटल की कमी को कैसे दूर करें?</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">बिज़नेस में वर्किंग कैपिटल की कमी को दूर करने के लिए सही योजना और मैनेज़मेंट की ज़रूरत पड़ती है, जिसके बारे में नीचे बताया गया है-</span></p>
<ol>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><b>रिज़र्व फंड की व्यवस्था:</b><span style="font-weight: 400;"> एक समझदार व्यापारी हमेशा बिज़नेस से होने वाले लाभ का एक निश्चित हिस्सा रिज़र्व फंड के रूप में रखता है, ताकि मुश्किल समय में वह इस फंड का इस्तेमाल बिज़नेस को आगे बढ़ाने में कर सके। बिज़नेस में वर्किंग कैपिटल की कमी होने पर रिज़र्व फंड का इस्तेमाल किया जा सकता है।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><b>कैश-फ़्लो मैनेज़मेंट:</b><span style="font-weight: 400;"> किसी भी बिज़नेस में कैश-फ़्लो मैनेज़मेंट बहुत ज़रूरी होता है, जिससे उसका कैश-फ़्लो हमेशा बेहतर रहे। उदाहरण के लिए, अगर आप कच्चे माल से कोई सामान बनाकर उसे बाज़ार में बेचते हैं, तो आपको उस सामान की लागत और लाभ मिलता है। आप लागत में से वर्किंग कैपिटल निकाल लें और उसका इस्तेमाल ज़रूरत पड़ने पर करें। इस तरह आपके बिज़नेस का कैश-फ़्लो भी सही रहेगा और वर्किंग कैपिटल की कमी भी नहीं होगी। </span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><b>फंड की सही योजना बनाएं:</b><span style="font-weight: 400;"> व्यापारियों को अपने बिज़नेस के दैनिक, साप्ताहिक या मासिक ख़र्चों का सही-सही आंकलन करने के बाद पहले से ही फंड की सही योजना बना लेनी चाहिए। ऐसा करके वर्किंग कैपिटल की कमी से बचा जा सकता है।</span></li>
</ol>
<p><span style="font-weight: 400;">बिज़नेस के लिए जितना वर्किंग कैपिटल आवश्यक होता है, उतनी ही आवश्यक होती है उसकी बैंकिंग, बिलिंग और अकाउंटिंग का सही मैनेज़मेंट। अगर इन चीजों को अनदेखा कर दिया गया या इनको सही से मैनेज़ नहीं किया गया, तो वर्किंग कैपिटल होने के बाद भी बिज़नेस को चलाने में परेशानी हो सकती है। इससे बचने के लिए व्यापारी OpenBook ऐप या डेस्कटॉप वर्जन इस्तेमाल कर सकते हैं। यह छोटे बिज़नेस (MSME) की लगभग हर ज़रूरत को एक ही जगह पूरा करने में मदद करता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हर बिज़नेस के लिए बैंकिंग बहुत महत्वपूर्ण होती है और OpenBook उनकी इस ज़रूरत को समझते हुए लॉगिन करते ही मुफ़्त में ज़ीरो बैलेंस डिजिटल बिज़नेस बैंक अकाउंट देता है। जिसकी मदद से बिज़नेस संबंधी सभी तरह के ट्रांजेक्शन्स जैसे पेमेंट कलेक्शन और ट्रांसफ़र आसानी से किए जा सकते हैं। साथ ही इसकी मदद से डिजिटल सेल्स इनवॉइस, सेल्स रिटर्न, पर्चेज़ इनवॉइस, पर्चेज़ रिटर्न और एस्टीमेट्स भी बनाया जा सकता है। केवल यही नहीं <a href="https://blog.openbook.co/hi/business-reports-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%85%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9b/">OpenBook कई तरह की ज़रूरी बिज़नेस रिपोर्ट्स देखने और उन्हें डाउनलोड करने की सुविधा भी देता है</a>, जिसका इस्तेमाल करके आप अपने बिज़नेस पर नज़र रख सकते हैं और उसे आगे भी बढ़ा सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">ऐसे में हम कह सकते हैं कि वर्किंग कैपिटल हर बिज़नेस के लिए महत्वपूर्ण होता है और बिज़नेस के कैपिटल को सही से मैनेज़ करने में <a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=co.openbook" rel="nofollow noopener" target="_blank">OpenBook</a> मदद करता है। यह आपके बिज़नेस को सही तरीक़े से मैनेज़ करने में आपकी सहायता करता है, जिससे आपका बिज़नेस बिना किसी परेशानी के आगे बढ़ता रहे और आप लाभ कमाते रहें।</span></p>
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		<title>GST रजिस्ट्रेशन कराने से MSMEs को होते हैं ये लाभ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[OpenBook]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Feb 2022 06:15:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MSME]]></category>
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					<description><![CDATA[सामान्य रूप से शासन (Government) संबंधी कार्यों को सही तरीक़े से चलाने के लिए पैसों की ज़रूरत पड़ती है और उन पैसों को एकत्र करने के लिए कर यानी टैक्स (Tax) का सहारा लिया जाता है। टैक्स को राजस्ववृद्धि (Revenue growth) का साधन माना जाता है। टैक्स लगाने का मुख्य उद्देश्य विकास संबंधी कार्यों के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-weight: 400;">सामान्य रूप से शासन (Government) संबंधी कार्यों को सही तरीक़े से चलाने के लिए पैसों की ज़रूरत पड़ती है और उन पैसों को एकत्र करने के लिए कर यानी टैक्स (Tax) का सहारा लिया जाता है। टैक्स को राजस्ववृद्धि (Revenue growth) का साधन माना जाता है। टैक्स लगाने का मुख्य उद्देश्य विकास संबंधी कार्यों के लिए धन एकत्र करना और जहां तक संभव हो सके देश की मुश्किल स्थिति को दूर करना है। यही वजह है कि जिनकी आय अधिक होती है, उन्हें कम आय वालों की अपेक्षा ज़्यादा टैक्स देना पड़ता है। सदियों तक सार्वजनिक क्षेत्रों से ही मुख्य रूप से राजस्व का संकलन (Revenue collection) किया जाता था, जिसमें एक्साइज ड्यूटी और कस्टम ड्यूटी मुख्य थे। हालांकि, बाद में धीरे-धीरे कई तरह के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर (Direct &amp; Indirect Tax) लगाए जाने लगे। GST भी उन्ही में से टैक्स का एक प्रकार है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">GST से पहले एक ही आइटम पर एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी, सरचार्ज, राज्य स्तर पर VAT जैसे कई टैक्स लगाए जाते थे, लेकिन GST ने इन सभी को ख़त्म कर दिया। GST ने टैक्स व्यवस्था को आसान बनाकर व्यापारियों से लेकर आम लोगों को काफ़ी राहत दी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले टैक्स व्यवस्था काफ़ी मुश्किल थी, जिसे आसान बनाने के लिए भारत सरकार ने 1 जुलाई, 2017 को GST की घोषणा की थी। GST (Goods &amp; Services Tax) एक अप्रत्यक्ष कर है। GST का लक्ष्य कर संग्रह नेटवर्क को विस्तृत करना और प्रक्रिया को व्यापार एवं विकास के अनुकूल बनाना है।</span></p>
<h3><b>किस तरह के बिज़नेस के लिए ज़रूरी है GST रजिस्ट्रेशन?</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">GST रजिस्ट्रेशन हर तरह के छोटे-बड़े बिज़नेस के लिए ज़रूरी है। अगर व्यवसायी अपने बिज़नेस का GST रजिस्ट्रेशन करवाते हैं, तो उन्हें सरकार की तरफ़ से कई तरह के फ़ायदे भी मिलते हैं। हालांकि,  40 लाख रूपये से कम वार्षिक टर्नओवर वाले बिज़नेस को GST पेमेंट नहीं करना होता है। देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए यह सीमा 20 लाख रूपये वार्षिक टर्नओवर है। अगर व्यापारी अपने बिज़नेस का GST रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते हैं, तो उन्हें अपने कम या ज़्यादा वार्षिक टर्नओवर पर भी टैक्स फाइल करना पड़ता है। वहीं, GST रजिस्ट्रेशन होने पर उन्हें केवल टर्नओवर की सीमा पार करने पर ही GST फाइल करना पड़ता है। इससे समय बचता है, जिसका इस्तेमाल बिज़नेस को आगे बढ़ाने में लगाया जा सकता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इसके अलावा GST रजिस्ट्रेशन के कई अन्य फ़ायदे भी हैं, जिनके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है।</span></p>
<h3><b>GST रजिस्ट्रेशन कराने से MSMEs को मिलते हैं ये लाभ:</b></h3>
<ul>
<li><b>आसानी से मिलता है बिज़नेस लोन:</b><span style="font-weight: 400;">  हर बिज़नेस में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। कई बार मुश्किल समय आने पर बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए लोन भी लेना पड़ता है। जहां, सामान्य बिज़नेस को लोन लेने परेशानी होती है, वहीं GST रजिस्टर्ड बिज़नेस को आसानी से बिज़नेस लोन मिल जाता है। RBI की गाइडलाइन के अनुसार, लोन लेने के लिए बिज़नेस का GST रजिस्ट्रेशन बहुत ज़रूरी है। बता दें कि बिज़नेस लोन लेते समय व्यापारी को अपने बिज़नेस का वैलिड GSTIN देना अनिवार्य होता है।</span></li>
<li><b>सरकारी योजनाओं का लाभ: </b><span style="font-weight: 400;">सरकार देश के छोटे और माध्यम बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए समय-समय पर कई तरह की योजनाएं शुरू करती है। इन योजनाओं का लाभ GST रजिस्टर्ड बिज़नेस आसानी से ले सकते हैं। जबकि, वहीं दूसरे बिज़नेस को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से नहीं मिल पाता है।</span></li>
<li><b>असंगठित सेक्टर की स्थिति में सुधार:</b><span style="font-weight: 400;"> GST कपड़ा उद्योग के साथ ही अन्य असंगठित सेक्टर की स्थिति में सुधार ला सकता है। भारत में असंगठित सेक्टर बड़े स्तर पर रोज़गार प्रदान करते हैं, लेकिन इन सेक्टर से काफ़ी कम टैक्स एकत्र हो पाता है। वहीं, अगर हर छोटे-बड़े बिज़नेस अपना GST रजिस्ट्रेशन करवाते हैं, तो टर्नओवर सीमा पार होने पर उन्हें GST भरना होगा। जिससे सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी और असंगठित सेक्टर की स्थिति में सुधार होगा। इससे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को रोज़गार मिल सकेगा।</span></li>
<li><b>आउटपुट टैक्स लायबिलिटी में कमी: </b><span style="font-weight: 400;">GST से पहले व्यापारियों को VAT, सेल्स टैक्स, कस्टम ड्यूटी जैसे सभी अप्रत्यक्ष टैक्स की पेमेंट करनी पड़ती थी, जो कुल मिलाकर लगभग 32% होता था। वहीं, GST के अंतर्गत केवल 18% से लेकर 28% तक ही टैक्स भरना पड़ता है। जिससे आउटपुट टैक्स लायबिलिटी (देनदारी) में कमी आयी है। इस वजह से अब व्यापारियों को पहले की अपेक्षा ज़्यादा लाभ भी मिलता है।</span></li>
<li><b>GST प्रणाली में सुधार:</b><span style="font-weight: 400;"> GST प्रणाली लगातार विकसित हो रही है और बिज़नेस से फ़ीडबैक मिलने के बाद उसमें लगातार सुधार किया जा रहा है। बिज़नेस से फ़ीडबैक मिलने के बाद GST काउंसिल नई रिटर्न प्रणाली की घोषणा भी करती है। वर्तमान नई रिटर्न प्रणाली के तहत टैक्स भरने वाले व्यापारियों को उनके वार्षिक टर्नओवर के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में विभाजित किया जाता है। पहले जहां, रिटर्न फाइल करने के लिए कई फ़ॉर्म भरने पड़ते थे, अब केवल एक या दो फ़ॉर्म ही भरने पड़ते हैं। इसके अलावा फ़ॉर्म पहले फाइल किए रिटर्न फ़ॉर्म से अपने आप ही भर जाता है।</span></li>
<li><b>आसानी से शुरू कर सकते हैं दूसरे राज्यों में बिज़नेस:</b><span style="font-weight: 400;"> पहले की टैक्स व्यवस्था के अंतर्गत दूसरे राज्यों में बिज़नेस शुरू करने के लिए हर राज्य का VAT राजस्ट्रेशन करवाना पड़ता है, जिसमें बहुत समय और पैसा बर्बाद हो जाता था। हर राज्य में VAT के रजिस्ट्रेशन की शर्तें भी अलग-अलग थी, इस वजह से काफ़ी परेशानी भी होती थी। लेकिन, GST एक सेंट्रल टैक्स व्यवस्था है, जो हर राज्य के लिए एक समान है। अब एक ही GST रजिस्ट्रेशन से किसी भी राज्य में बिज़नेस शुरू किया जा सकता है। इससे व्यापारियों को ज़्यादा फ़ायदा होता है।</span></li>
<li><b>लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में कमी:</b><span style="font-weight: 400;"> पहले एक राज्य से दूसरे राज्य में माल भेजने पर व्यापारियों को हर सीमा चौकी पर पैसे देने पड़ते थे, जिससे लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बहुत ज़्यादा हो जाता था। वहीं, कुछ व्यापारी लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को कम करने के लिए चौकियों पर गश्त लगाने वाले अधिकारियों को घूस देते थे, जिससे भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी होती थी। दोनों ही स्थितियां देश और बिज़नेस के लिए अच्छी नहीं थी। GST ने इन दोनों समस्याओं का समाधान शुरुआत में ही कर दिया। अब बिज़नेस का GST रजिस्ट्रेशन होने पर किसी भी राज्य में बिना परेशानी के माल भेजा जा सकता है।</span></li>
</ul>
<h3><b>GST रजिस्ट्रेशन के साथ ही MSMEs के लिए OpenBook क्यों ज़रूरी है?</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">बिज़नेस छोटा हो या बड़ा, सबको सही से मैनेज़ करना पड़ता है। अगर बिज़नेस को सही से मैनेज़ नहीं किया गया, तो उसके सफलता की संभावना कम हो जाती है। जिस तरह से GST रजिस्ट्रेशन बिज़नेस के टैक्स को मैनेज़ करने में मदद करता है, वैसे ही OpenBook पूरे बिज़नेस को मोबाइल और डेस्कटॉप पर आसानी से मैनेज़ करने में मदद करता है। बिज़नेस की बैंकिंग को अनदेखा करने पर लाभ और नुक़सान का सही अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता है। यहीं पर OpenBook बिज़नेस की सबसे ज़्यादा मदद करता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;"><a href="https://blog.openbook.co/hi/business-banking-made-simple/">OpenBook पर रजिस्ट्रेशन करते ही मुफ़्त में ज़ीरो बैलेंस डिजिटल बिज़नेस बैंक अकाउंट मिलता है</a>, जिससे बिज़नेस संबंधी सभी ट्रांजेक्शन्स जैसे पेमेंट कलेक्शन और ट्रांसफ़र मिनटों में किए जा सकते हैं। इसके साथ ही इसके AtriaOne डेबिट कार्ड से GST रजिस्ट्रेशन की फ़ीस, ट्रांसपोर्टेशन चार्ज़, दुकान का किराया, बिजली और फोन बिल की पेमेंट या अन्य किसी सब्सक्रिप्शन की पेमेंट आसानी से की जा सकती है। केवल यही नहीं, OpenBook पर आसानी से पेमेंट लिंक के साथ डिजिटल बिल बनाकर कस्टमर्स को उनके व्हाट्सऐप, SMS या ईमेल पर भेजा जा सकता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस तरह हम कह सकते हैं कि GST का रजिस्ट्रेशन हर बिज़नेस के लिए बहुत ज़रूरी है। वहीं, <a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=co.openbook" rel="nofollow noopener" target="_blank">OpenBook</a> का इस्तेमाल करके बिज़नेस को आसान बनाया जा सकता है और लाभ कमाकर बिज़नेस को काफ़ी आगे भी बढ़ाया जा सकता है।</span></p>
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		<title>OpenBook ने किया मेरे बिज़नेस की सभी समस्याओं का समाधान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[OpenBook]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Jan 2022 07:16:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कस्टमर स्टोरीज़]]></category>
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					<description><![CDATA[मेरा नाम महेश गुप्ता है और मैं वाराणसी के लंका क्षेत्र का रहने वाला हूं। हमारा लंका में ही ख़ानदानी किराना स्टोर है, जो काफ़ी बड़ा है। कुछ सालों तक पिता जी के साथ किराना स्टोर का बिज़नेस चलाने के बाद मैंने अपना खुद का बिज़नेस शुरू करने की योजना बनाई। छोटे शहरों और गांवों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-weight: 400;">मेरा नाम महेश गुप्ता है और मैं वाराणसी के लंका क्षेत्र का रहने वाला हूं। हमारा लंका में ही ख़ानदानी किराना स्टोर है, जो काफ़ी बड़ा है। कुछ सालों तक पिता जी के साथ किराना स्टोर का बिज़नेस चलाने के बाद मैंने अपना खुद का बिज़नेस शुरू करने की योजना बनाई। छोटे शहरों और गांवों में मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल को देखकर मैंने मोबाइल स्टोर खोलने के बारे में सोचा। मोबाइल स्टोर खोलने के लिए मुझे काफ़ी पैसों की ज़रूरत पड़ी। इसके लिए मुझे बैंक से लोन भी लेना पड़ा। मोबाइल स्टोर तो शुरू हो गया, लेकिन मुझे पता नहीं था कि अपने दम पर अकेले कोई भी बिज़नेस करना कितना मुश्किल होता है।</span></p>
<h3><b>बिज़नेस शुरू करने के बाद करना पड़ा इन परेशानियों का सामना:</b></h3>
<h4><b>बैंकिंग:</b></h4>
<p><span style="font-weight: 400;">मोबाइल स्टोर पर रोज़ाना ठीक-ठाक बिज़नेस हो जाता था, इसलिए मुझे करेंट अकाउंट की ज़रूरत थी। क्योंकि ट्रांजेक्शन बहुत ज़्यादा करना पड़ता था और बिज़नेस का रजिस्ट्रेशन भी करवाना था। बिना बिज़नेस करेंट अकाउंट के बिज़नेस का रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया जा सकता था। इसलिए मैंने बैंक में करेंट अकाउंट के लिए आवेदन किया, लेकिन उसमें काफ़ी समय लग गया। बैंक कर्मचारी ने करेंट अकाउंट खोलने के लिए कई दस्तावेज मांगे, जो मेरे पास नहीं थे। इस वजह से करेंट अकाउंट खुलवाने में बड़ी मुश्किल हुई। हालांकि, किसी तरह करेंट अकाउंट खुल गया, लेकिन फिर भी मेरी बैंकिंग की समस्या हल नहीं हुई। अक्सर पैसों का सही हिसाब रखने में परेशानी होती थी। कितने पैसे आए और कितने पैसे गए, इसे देखने के लिए बार-बार बैंक की वेबसाइट पर जाना पड़ता था। इसके बाद भी कुछ समझ में नहीं आता था। इसलिए, मोबाइल स्टोर से फ़ायदा हो रहा है या नहीं, यह भी पता नहीं चलता था।</span></p>
<h4><b>बिलिंग:</b></h4>
<p><span style="font-weight: 400;">शुरुआत में मैं अकेले ही स्टोर संभालता था, लेकिन स्टोर बढ़ने की वजह से उसे अकेले संभालने में मुश्किल होने लगी। इसके बाद मैंने धीरे-धीरे कर्मचारियों को रखना शुरू कर दिया। वर्तमान में मोबाइल स्टोर में लगभग 5 कर्मचारी काम करते हैं। धीरे-धीरे स्टोर पर रोज़ाना अच्छी संख्या में ग्राहक आने लगे थे। ज़्यादा कर्मचारी होने के बाद भी अक्सर सेल्स इनवॉइस, सेल्स रिटर्न, पर्चेज़ ऑर्डर, पर्चेज़ रिटर्न और एस्टीमेट्स बनाने में परेशानी होती थी और कई बार ज़्यादा ग्राहकों के आ जाने से समय पर बिलिंग भी नहीं हो पाती थी, इसलिए कई ग्राहक चिढ़ जाते थे। दरअसल, उस समय बिलिंग पेपर वाले बिल बुक पर होती थी और हाथ से सब कुछ भरकर बिल बनाने में काफ़ी समय लग जाता था। इसकी वजह से कई बार ग्राहक मोबाइल पसंद आने के बाद भी बिना लिए वापस चले जाते थे। इससे भी बिज़नेस पर बुरा असर पड़ रहा था।</span></p>
<h4><b>अकाउंटिंग:</b></h4>
<p><span style="font-weight: 400;">पिता जी के साथ उनकी किराने की दुकान पर काम करने के दौरान सारा हिसाब-किताब कॉपी में करने की आदत थी। इसलिए, जब मैंने अपना मोबाइल स्टोर शुरू किया तो सारा हिसाब-किताब कॉपी पर ही करता था। उस समय स्टोर भी बड़ा नहीं था। लेकिन, समय के साथ मोबाइल की बिक्री बढ़ने लगी और स्टोर को बड़ा करना पड़ा। स्टोर बड़ा होने की वजह से हिसाब-किताब में हमेशा दिक्कत होती थी। अब हिसाब-किताब कॉपी की बजाय डेस्कटॉप पर होने लगा था, उसके बाद भी अक्सर पेमेंट्स में गड़बड़ी देखने को मिलती थी। बिज़नेस बड़ा होने की वजह से हिसाब-किताब संभालने के लिए मैंने एक अकाउंटेंट भी रखा, लेकिन ज़्यादा फ़ायदा नहीं हुआ। कई बार अकाउंटेंट कुछ हिसाब-किताब भूल जाता था, जिसकी वजह से उसकी एंट्री नहीं हो पाती थी और हिसाब में गड़बड़ी हो जाती थी। इसकी वजह से कई बार नुक़सान उठाना पड़ा था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एक दिन स्टोर पर बैठकर मैं अपनी इन सभी परेशानियों के बारे में सोच रहा था। फिर मैंने दिमाग को शांत करने के लिए यूट्यूब खोल लिया। सोचा थोड़ी देर कोई गाना सुन लेता हूं। उससे दिमाग भी शांत हो जाएगा और शायद कोई रास्ता भी निकल आए। मैंने यूट्यूब पर एक गाना लगाया। गाना शुरू होने से पहले OpenBook ऐप का ऐड आया। ऐड में बिज़नेस करो सिंपल सुनाई पड़ा। फिर मैंने ऐड को शुरू से ध्यान से देखा, तो पता चला कि मैं रोज़ाना जिन परेशानियों का सामना कर रहा हूं, OpenBook उन सभी समस्याओं का समाधान करता है। इसके बाद मैंने गाना सुनना छोड़ कर, बिना समय गंवाए तुरंत मोबाइल में OpenBook ऐप डाउनलोड किया। मोबाइल नंबर से लॉगिन करते समय मुझसे बिज़नेस संबंधी कुछ सामान्य जानकारी मांगी गई। सारी जानकारी भरते ही ऐप इस्तेमाल के लिए तैयार था।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आपको जानकर हैरानी होगी कि OpenBook पर लॉगिन करते ही बिज़नेस को मैनेज़ करने के लिए डिजिटल बिज़नेस बैंक अकाउंट मिलता है। सफलतापूर्वक लॉगिन करने के बाद सबसे पहले मैंने OpenBook के सभी फ़ीचर्स के बारे में ध्यान से देखा। इस्तेमाल करने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए ऐप में कुछ एक्सप्लेनर वीडियो भी थे, ताकि पहली बार इस्तेमाल करने वाला उसके सभी फ़ीचर्स के बारे में अच्छे से समझ जाए। इसके बाद मैंने OpenBook को लगातार इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। तब से लेकर आज तक मैं लगातार OpenBook का इस्तेमाल कर रहा हूं। OpenBook ने मेरे बिज़नेस को सच में बहुत ज़्यादा आसान बना दिया है।</span></p>
<h3><b>OpenBook ने किया बैंकिंग, बिलिंग और अकाउंटिंग संबंधी सभी समस्याओं का समाधान:</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">जब से मैंने OpenBook इस्तेमाल करना शुरू किया है, तब से बिज़नेस की बैंकिंग काफ़ी आसान हो गई है। OpenBook पर लॉगिन करने के बाद एक डिजिटल बिज़नेस बैंक अकाउंट मिला, जिससे मैं अपने बिज़नेस की बैंकिंग को आसानी से मैनेज़ करता हूं। अब पेमेंट कलेक्शन से लेकर ट्रांसफ़र और कर्मचारियों की सैलरी तक सभी काम आसानी से हो जाते हैं। इसके साथ ही OpenBook ने एक AtriaOne डेबिट कार्ड भी दिया है, जिससे मैं अपने बिज़नेस के सभी ख़र्चों जैसे दुकान का किराया, कर्मचारियों की सैलरी, सब्सक्रिप्शन की पेमेंट और अन्य ख़र्चों को आसानी से मैनेज़ कर लेता हूं। अब मैं आसानी से एक ही जगह आने-जाने वाले पैसों पर नज़र रख सकता हूं, जिससे हिसाब-किताब में भी गड़बड़ी नहीं होती है। <a href="https://blog.openbook.co/hi/business-banking-made-simple/">OpenBook ने मेरी बिज़नेस बैंकिंग को सच में बहुत आसान बना दिया है</a>।</span></p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-full wp-image-370" src="https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2022/01/online-business-make-convenient-happen-scaled.jpg" alt="Openbook banking" width="2560" height="1709" title="OpenBook ने किया मेरे बिज़नेस की सभी समस्याओं का समाधान 2" srcset="https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2022/01/online-business-make-convenient-happen-scaled.jpg 2560w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2022/01/online-business-make-convenient-happen-300x200.jpg 300w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2022/01/online-business-make-convenient-happen-1024x683.jpg 1024w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2022/01/online-business-make-convenient-happen-768x513.jpg 768w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2022/01/online-business-make-convenient-happen-1536x1025.jpg 1536w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2022/01/online-business-make-convenient-happen-2048x1367.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बिलिंग की बात करूं, तो OpenBook ने बिलिंग को वाक़ई बहुत आसान बना दिया है। अब एक साथ कई ग्राहकों की बिलिंग बड़ी आसानी से हो जाती है। अब बिलिंग करते समय GST का हिसाब करने के लिए बार-बार कैलकुलेटर का भी इस्तेमाल नहीं करना पड़ता है। OpenBook ऐप से तुरंत पेमेंट लिंक के साथ GST वाली बिल बन जाती है, जिसे हम ग्राहक के व्हाट्सऐप, SMS और ईमेल पर भेज देते हैं। इसके बाद ग्राहक पेमेंट लिंक द्वारा UPI, IMPS, NEFT और RTGS जैसे ऑनलाइन माध्यमों से पेमेंट करते है। पेमेंट लिंक के माध्यम से मिलने वाली पेमेंट अपने आप अकाउंटिंग में भी दर्ज हो जाती है। इसके साथ ही अब मुझे पहले की तरह पर्चेज़ ऑर्डर,पर्चेज़ रिटर्न और सेल्स रिटर्न पेपेर पर नहीं बनाना पड़ता है। अब मैं ये सब OpenBook पर ही बना लेता हूं और वेंडर/ग्राहक को उनकी मोबाइल पर भेज देता हूं। पहले की अपेक्षा अब बिज़नेस की बिलिंग बहुत आसान हो गई है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सबसे हैरानी की बात यह है कि अब मुझे बिज़नेस की अकाउंटिंग की भी चिंता नहीं होती है। अब OpenBook से ही मेरा अकाउंटेंट पूरी अकाउंटिंग संभालता है और मैं समय मिलने पर उसकी जांच कर लेता हूं। अब अकाउंटेंट को मैनुअली सेल्स और पर्चेज़ का अमाउंट नहीं भरनी पड़ता है। जैसे ही कोई ग्राहक पेमेंट करता है या मैं अपने वेंडर को पेमेंट करता हूं, उसकी एंट्री अपने आप अकाउंटिंग में हो जाती है। इससे काफ़ी समय बच जाता है और पूरा हिसाब-किताब भी सही रहता है। इसके अलावा OpenBook बिज़नेस का स्टॉक भी आसानी से मैनेज हो जाता है। सभी सेल्स और पर्चेज़ का हिसाब-किताब OpenBook पर मौजूद रहता है, इसलिए कितनी मोबाइल बिक चुकी है और कितनी स्टॉक में बची हुई है, यह तुरंत पता चल जाता है। साथ ही कैश फ़्लो और प्रॉफ़िट एवं लॉस रिपोर्ट की सहायता से यह भी पता चल जाता है कि बिज़नेस में कितना पैसा लगा और कितना फ़ायदा हुआ।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस तरह मैं कह सकता हूं कि <a href="https://openbook.co/" rel="nofollow noopener" target="_blank">OpenBook</a> ने मेरी सभी समस्याओं का समाधान एक जगह केवल उंगलियों की दूरी पर कर दिया है। अब न ही मुझे बैंकिंग, बिलिंग और अकाउंटिंग में समस्या होती है और न ही मेरे बिज़नेस को कोई नुक़सान होता है। OpenBook ने मेरे बिज़नेस की सबसे बड़ी रुकावटों का समाधान बड़ी आसानी से कर दिया और मेरे बिज़नेस को बढ़ने में काफ़ी मदद की है। अगर सच कहूं, तो OpenBook ने सही मायने में मुझे स्मार्ट व्यापारी बना दिया है। अगर आप भी मेरी तरह स्मार्ट व्यापारी बनना चाहते हैं, तो बिना देर किए आज ही OpenBook डाउनलोड करें।</span></p>
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		<title>5 बिज़नेस, जिन पर कोरोना की तीसरी लहर से पड़ सकता है बुरा असर!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[OpenBook]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Jan 2022 06:16:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MSME]]></category>
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					<description><![CDATA[कोरोना वायरस की शुरुआत 2019 में हुई थी। शुरुआत में इसका असर ज़्यादा नहीं था, लेकिन समय के साथ-साथ इसका असर इस तरह बढ़ा कि हालात सुधारने के लिए लॉकडाउन लगाना पड़ा। पहला लॉकडाउन मार्च, 2020 में लगाया गया था, जिससे देश भर के बिज़नेस पर असर पड़ा। लॉकडाउन ने व्यवसायियों की कमर तोड़ दी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-weight: 400;">कोरोना वायरस की शुरुआत 2019 में हुई थी। शुरुआत में इसका असर ज़्यादा नहीं था, लेकिन समय के साथ-साथ इसका असर इस तरह बढ़ा कि हालात सुधारने के लिए लॉकडाउन लगाना पड़ा। पहला लॉकडाउन मार्च, 2020 में लगाया गया था, जिससे देश भर के बिज़नेस पर असर पड़ा। लॉकडाउन ने व्यवसायियों की कमर तोड़ दी और देश की अर्थव्यवस्था की हालत ख़राब हो गई। लॉकडाउन हटने के बाद हालात में धीरे-धीरे सुधार हो ही रहा था कि 2021 में कोरोना की दूसरी लहर ने फिर से बिज़नेस की हालत ख़राब कर दी। अब हमारे सामने कोरोना की तीसरी लहर भी है, जिसका असर बिज़नेस पर पड़ना शुरू हो गया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">लोगों को उम्मीद थी कि साल 2022 पहले से बेहतर होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। साल शुरू होते ही कोरोना महामारी ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया। इसका प्रभाव पूरे देश में दिख रहा है। कोरोना की वजह से कई जगहों पर वीकेंड लॉकडाउन लगाए जा रहे हैं, तो कहीं पर नाइट कर्फ़्यू लगाए जा रहे हैं। कोरोना का सबसे ज़्यादा प्रभाव व्यवसायियों पर देखने को मिल रहा है। कई सेक्टर में दूसरे लॉकडाउन के बाद से धीरे-धीरे सुधार हो रहा था, लेकिन तीसरी लहर ने एक बार फिर से भारतीय बाज़ार में मंदी ला दी है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">ऑटोमोबाइल सेक्टर, आभूषण सेक्टर, रेडीमेड सेक्टर हो या ट्रैवेल और टूरिज़्म सेक्टर हो सबकी हालत धीरे-धीरे ख़राब होने लगी है। इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि कोरोना की तीसरी लहर से कौन से ऐसे 5 बिज़नेस हैं, जिन पर असर पड़ सकता है। साथ ही इसी ब्लॉग में हम यह भी बताएंगे कि आप किस तरह से कोरोना के प्रभाव को अपने बिज़नेस के लिए थोड़ा कम कर सकते हैं।</span></p>
<h3><b>इन बिज़नेस पर पड़ सकता है कोरोना का असर:</b></h3>
<h4><b>एविएशन/ट्रैवेल और टूरिज़्म सेक्टर:</b><span style="font-weight: 400;"><br />
जिस तरह से रोज़ाना कोरोना के नए मामले लगातार बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए कह सकते हैं कि आने वाले दिनों में यह स्थिति और ख़राब हो सकती है। अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो हो सकता है कि पिछली बार की तरह इस बार भी कहीं आने-जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाए। इससे एविएशन/ट्रैवेल और टूरिज़्म सेक्टर पर असर पड़ सकता है। कोरोना की वजह से लोग यात्रा के लिए बाहर नहीं जा रहे हैं, क्योंकि ज़्यादातर जगहें बंद हो चुकी हैं या तो उन पर पाबंदी लगा दी गई है। ज़्यादातर लोग नया साल मानने के लिए कहीं न कहीं घूमने जाते हैं, लेकिन कोरोना की वजह से इस साल बहुत कम लोग ही बाहर जा पाए। कई लोगों ने अपने ट्रैवेल प्लान को आगे बढ़ाते हुए टिकट भी कैंसल करना शुरू कर दिया है, जो इस सेक्टर के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।</span></h4>
<h4><b>हॉस्पिटैलिटी सेक्टर:<br />
</b><span style="font-weight: 400;">कोरोना महामारी की वजह से पिछली बार हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर बहुत बुरा असर पड़ा था। उम्मीद थी कि इस बार ऐसा नहीं होगा, पर वर्तमान हालात कुछ और ही कह रहे हैं। नए साल की शुरुआत ही लोगों ने घर में बंद रहकर की। कई बड़े शहरों में 31 दिसंबर, 2021 की रात से ही कर्फ़्यू लगा दिया गया था। जिस वजह से पब, बार, रेस्टोरेंट्स का बिज़नेस बहुत कम हो पाया। अभी हालत ये है कि कोरोना के डर से लोगों ने घर से बाहर निकलना कम कर दिया है। अब लोग रेस्टोरेंट में जाकर खाने की बजाय फिर से घर पर ऑर्डर करके खा रहे हैं। इसके साथ ही होटल और रिज़ॉर्ट में भी काफ़ी कम बुकिंग हो रही है। कोरोना के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं और आने वाले समय में यह स्थिति और भी ख़राब हो सकती है, जिसका असर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर पड़ सकता है।</span></h4>
<h4><b>ऑटोमोबाइल सेक्टर:</b><span style="font-weight: 400;"><br />
भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर की हालत पहले से ही ख़राब चल रही थी और कोरोना महामारी की वजह से लगे पहले लॉकडाउन ने इस सेक्टर की हालत और ज़्यादा ख़स्ता कर दी। लॉकडाउन की वजह से ऑटोमोबाइल की मांग काफ़ी गिर गई, जिसकी वजह से प्रोडक्शन कम करना पड़ा और काफ़ी लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी। जानकारी के अनुसार, ऑटोमोबाइल उद्योग में इस्तेमाल होने वाले सारे पार्ट्स एक जगह नहीं बनते हैं। ऐसे में उन्हें अलग-अलग जगहों से मंगाना पड़ता है। कुछ पार्ट्स दूसरे देशों से भी मंगाने पड़ते हैं। ऐसे में अगर कोरोना की तीसरी लहर की वजह से लॉकडाउन लगाया गया, तो पार्ट्स को एक जगह से दूसरे जगह ले जाने में परेशानी होगी। अब अगर गाड़ी के सारे पार्ट्स एक जगह नहीं होंगे, तो गाड़ी तैयार कैसे होगी, जिससे इस सेक्टर पर बहुत ज़्यादा असर पड़ सकता है।</span></h4>
<h4><b>फ़ार्मा सेक्टर:</b><span style="font-weight: 400;"><br />
फ़ार्मा सेक्टर एक ऐसा सेक्टर है, जिसके बारे में हमेशा कहा जाता है कि इसमें हर समय काफ़ी फ़ायदा होता है। हालांकि, यह पूरी तरह से सच नहीं है। कोरोना की दूसरी लहर के समय हम सभी ने देखा था कि किस तरह से देश में ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई थी। इसके साथ ही कुछ ख़ास दवाओं के साथ ही सैनिटाइज़र, मास्क की भी काफ़ी कमी देखी गई थी। कोरोना के समय कुछ ख़ास दवाओं की ज़्यादा मांग होती है, ऐसे में अगर समय पर उनका प्रोडक्शन नहीं किया गया, तो कमी की वजह से बिज़नेस और लोगों के जीवन दोनों पर असर पड़ सकता है। कुछ दिनों पहले Dolo 650 टैबलेट की मांग अचानक से बहुत ज़्यादा बढ़ गई थी, जिससे दूसरी दवाओं की मांग पर असर पड़ा था। इसे देखते हुए कह सकते हैं कि कोरोना का असर फ़ार्मा सेक्टर पर भले ही ज़्यादा न पड़े, लेकिन असर पड़ सकता है।</span></h4>
<h4><b>जूलरी/हीरे और जवाहरात का बिज़नेस:</b><span style="font-weight: 400;"><br />
BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले लॉकडाउन की वजह इस सेक्टर को लगभग सवा अरब डॉलर का नुक़सान होने की आशंका थी। दरअसल, भारत के तराशे और पॉलिश किए हुए हीरो का सबसे बड़ा निर्यात केंद्र चीन और हॉन्ग कॉन्ग है। पिछली बार इन दोनों ही जगहों पर कोरोना महामारी का बहुत बुरा असर हुआ था। यह किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है कि कोरोना वायरस की शुरुआत चीन से ही हुई थी। ऐसे में अगर इस बार भी कोरोना के मामले ज़्यादा बढ़े और पूरी तरह लॉकडाउन लगाने की स्थिति उत्पन्न हुई तो इन देशों में होने वाला निर्यात बंद हो जाएगा। जिसका असर जूलरी/हीरे और जवाहरात के बिज़नेस पर पड़ सकता है। इसके अलावा लॉकडाउन की वजह से शादी-ब्याह भी कम हो गए हैं और लोग ज़्यादा जूलरी नहीं ख़रीद रहे हैं, जिसका असर भी इस बिज़नेस पर देखा जा सकता है।</span></h4>
<p><span style="font-weight: 400;">ऊपर बताए गए पांच बिज़नेस के अलावा हर तरह के ऑफ़लाइन बिज़नेस पर भी पिछले लॉकडाउन का प्रभाव पड़ा था। अगर इस बार भी पिछली बार जैसे हालात उत्पन्न हुए, तो उम्मीद है कि इस बार भी ऑफ़लाइन बिज़नेस पर असर पड़ सकता है। इस स्थिति से पूरी तरह बचा तो नहीं जा सकता है, लेकिन इसके प्रभाव को कम ज़रूर किया जा सकता है।</span></p>
<h3><b>कोरोना के प्रभाव से अपने बिज़नेस को कैसे बचाएं?</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">हर तरह के बिज़नेस को कोरोना के प्रभाव से नहीं बचाया जा सकता है, लेकिन कुछ बिज़नेस हैं, जिन्हें लॉकडाउन में भी आसानी से चलाया जा सकता है। ऐसे ही कुछ बिज़नेस पर कोरोना का ज़्यादा असर न पड़े, इसके लिए आप नीचे बताए गए उपायों का पालन कर सकते हैं।</span></p>
<ol>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">अगर आप किराने की दुकान, इलेक्ट्रॉनिक स्टोर, कपड़े की दुकान जैसे स्मॉल बिज़नेस चलाते हैं, तो कोशिश करें कि उसे ऑफ़लाइन के साथ-साथ ही ऑनलाइन कर लें। आप ये सारी चीजें फ़्लिपकार्ट या अमेजन के ज़रिए ऑनलाइन भी बेच सकते हैं। आपने भी देखा होगा कि लॉकडाउन में जहां ऑफ़लाइन बिज़नेस पूरी तरह से ठप पड़ गए थे, वहीं ऑनलाइन बिज़नेस मज़े से कमाई कर रहे थे। इसलिए आप भी जितनी जल्दी हो अपना बिज़नेस ऑनलाइन कर लें।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">लॉकडाउन की वजह से अगर बिक्री कम हो जाए तो आप कम से कम कर्मचारियों की मदद से भी अपना बिज़नेस चला सकते हैं। बिज़नेस मैनेज़ करने के लिए ज़्यादा कर्मचारियों की बजाय आप बिज़नेस से जुड़े कोई सॉफ़्टवेयर या ऐप इस्तेमाल कर सकते हैं, जो आपकी बिज़नेस मैनेज़ करने में मदद करें। इससे आप कम कर्मचारी रखकर भी अपना बिज़नेस चला सकते हैं और प्रॉफ़िट कमा सकते हैं। </span><a href="http://bit.ly/2U36hkD" rel="nofollow noopener" target="_blank"><span style="font-weight: 400;">OpenBook</span></a><span style="font-weight: 400;"> एक ऐसा ही ऐप है, जो ऑनलाइन बिज़नेस बैंकिंग, बिलिंग और अकाउंटिंग की सुविधा देता है। इसकी मदद से आप कम कर्मचारियों के साथ भी अपना बिज़नेस बड़ी आसानी से मैनेज़ कर सकते हैं।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">अगर आप हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े बिज़नेस जैसे रेस्टोरेंट चलाते हैं, तो आपको अपने रेस्टोरेंट को जोमैटो और स्विगी पर लिस्ट कर देना चाहिए। इससे आपके ग्राहक या दूसरे नए ग्राहक सीधे ऐप की मदद से आपके रेस्टोरेंट से खाना ऑर्डर कर सकते हैं। इस तरह लॉकडाउन लगने पर भी आप अपना रेस्टोरेंट का बिज़नेस चला सकते हैं।</span></li>
</ol>
<p><span style="font-weight: 400;">कोरोना महामारी के असर को पूरी तरह से ख़त्म नहीं किया जा सकता है। हालांकि, इससे बचा ज़रूर जा सकता है। इससे बचने के लिए लॉकडाउन के नियमों का पालन करें और खुद को दूर रखें, हर समय मास्क लगाएं, सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें, बीमारी के कोई भी लक्षण दिखने पर RTPCR टेस्ट करवाएं। इन सब तरीक़ों का इस्तेमाल करके आप खुद को और अपने करीबी लोगों को सुरक्षित रख सकते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही इस महामारी का अंत हो जाएगा और आपके जीवन एवं बिज़नेस दोनों में सुधार होगा।</span></p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>ज़ीरो बैलेंस करेंट अकाउंट के 7 फ़ायदे, जिनके बारे में हर बिज़नेस को जानना चाहिए</title>
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		<dc:creator><![CDATA[OpenBook]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Dec 2021 07:34:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बैंकिंग]]></category>
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					<description><![CDATA[करेंट अकाउंट मुख्य रूप से व्यावसायिक संस्थाओं द्वारा खोला जाता है, जो नियमित रूप से बड़ी संख्या में ट्रांजेक्शन्स करते हैं। इसमें पैसे जमा करना, निकालना, चेक जमा करना और पेमेंट कलेक्ट करना आदि शामिल होते हैं। करेंट अकाउंट का इस्तेमाल किसी भी संस्था के साथ-साथ फ़्रीलांसर, एक व्यक्ति या एक व्यक्ति की कंपनी के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-weight: 400;">करेंट अकाउंट मुख्य रूप से व्यावसायिक संस्थाओं द्वारा खोला जाता है, जो नियमित रूप से बड़ी संख्या में ट्रांजेक्शन्स करते हैं। इसमें पैसे जमा करना, निकालना, चेक जमा करना और पेमेंट कलेक्ट करना आदि शामिल होते हैं। करेंट अकाउंट का इस्तेमाल किसी भी संस्था के साथ-साथ फ़्रीलांसर, एक व्यक्ति या एक व्यक्ति की कंपनी के मालिक द्वारा भी किया जा सकता है। अक्सर देखा जाता है कि इनमें से ज़्यादातर लोग बिज़नेस संबंधी ट्रांजेक्शन्स के लिए अपने सेविंग अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं, जिससे वो ज़ीरो बैलेंस करेंट अकाउंट की सर्विस के फ़ायदों से वंचित रह जाते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि छोटे और मध्यम बिज़नेस (SMB) के लिए ज़ीरो बैलेंस करेंट अकाउंट बहुत उपयोगी है, क्योंकि उन्हें अपने अकाउंट में मासिक औसत बैलेंस (MAB) रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। जिससे वो अपने पूरे पैसों को बिज़नेस के काम में लगा सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इसलिए इस ब्लॉग में हम आपको ज़ीरो बैलेंस करेंट अकाउंट के 7 मुख्य फ़ायदों के बारे में बताएंगे।</span></p>
<ol>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><b>अलिमिटेड ट्रांजेक्शन्स:</b><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;"> ज़ीरो बैलेंस करेंट अकाउंट होने पर आपको अनलिमिटेड ट्रांजेक्शन्स करने की सुविधा मिलती है। यानी आप अपनी आवश्यकता के अनुसार, चाहे जितनी बार पैसे भेज और निकाल सकते हैं। इसके साथ ही डेली अपर लिमिट भी बहुत ज़्यादा होती है, जिससे बिज़नेस चलाने के लिए आपके पास पर्याप्त कैश मौजूद रहता है।</span></span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><b>कोई ट्रांजेक्शन चार्ज़ नहीं:</b><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;"> व्यवसायी बिना ट्रांजेक्शन चार्ज़ की परवाह किए RTGS, NEFT, ECS, IMPS और UPI जैसे माध्यमों से एक या एक से ज़्यादा पेमेंट कर सकते हैं।</span></span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><b>बिज़नेस फंड को अच्छे से मैनेज़ करें: </b><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;">करेंट अकाउंट आपको अपने बिज़नेस और पर्सनल फंड (फ़ाइनेंस) को अलग-अलग रखने में मदद करता है। इसकी मदद से बिज़नेस के कैशफ़्लो को आसानी से ट्रैक और ऑडिट किया जा सकता है, जिससे आपको अपने बजट के अनुसार एक्सपेंस की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है। करेंट अकाउंट टैक्स की गणना और कटौती के लिए भी उपयोगी होता है।</span></span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><b>बिज़नेस की वैधता:</b><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;"> बिज़नेस छोटा हो या बड़ा उसे संभालते समय पर्सनल अकाउंट का इस्तेमाल करना या बिज़नेस सम्बंधी एक्सपेंसेस को मैनेज़ करना ग़ैर-पेशेवर (Unprofessional) माना जाता है। ऐसे में अगर आप अपने बिज़नेस के लिए करेंट अकाउंट का इस्तेमाल करेंगे, तो उसकी वैद्यता बढ़ जाती है। इसके साथ ही बिज़नेस संबंधी लोन लेने में भी आसानी होती है।</span></span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><b>कोई स्थायी इंस्ट्रक्शन चार्ज़ नहीं:</b><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;"> बिज़नेस चलाते समय अक्सर फंड ट्रांसफ़र, थर्ड पार्टी पेमेंट, लोन की EMI या उनकी भरपाई के लिए समय-समय पर निर्धारित पेमेंट करना पड़ता है। करेंट अकाउंट ज़ीरो चार्ज़ के साथ ऐसे पेमेंट को ऑटोमेट करने के लिए स्थायी निर्देश सुविधा का लाभ उठाने में मदद करता है।</span></span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><b>साख-योग्यता:</b><span style="font-weight: 400;"><span style="font-weight: 400;"> ज़्यादातर बिज़नेस पैसों की कमी होने पर लोन लेकर बिज़नेस को आगे बढ़ाना चाहते हैं। ऐसे में अगर किसी प्रतिष्ठित बैंक में आपका या आपके बिज़नेस का करेंट अकाउंट है, तो आपकी साख-योग्यता बढ़ती है और आपको आसानी से बिज़नेस लोन मिल सकता है।</span></span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><b>वैल्यू एडेड सर्विसेस:</b> वर्तमान में बिज़नेस की विभिन्न आवश्यकताओं के आधार पर कई प्रकार के करेंट अकाउंट उपलब्ध हैं। इन सभी अकाउंट्स के साथ कुछ वैल्यू एडेड सर्विसेस भी आती हैं, जिससे बिज़नेस चलाने में आसानी होती है। उदाहरण के लिए, OpenBook का करेंट अकाउंट ख़ासतौर से SMB की ज़रूरतों को पूरा करता है और  बिलिंग, अकाउंटिंग और GST को आसान बनाने के लिए टूल्स प्रदान करता है।</li>
</ol>
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		<title>OpenBook पर आसानी से मैनेज़ करें बिज़नेस की Inventory</title>
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		<dc:creator><![CDATA[OpenBook]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Dec 2021 07:32:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इनवॉइस]]></category>
		<category><![CDATA[inventory]]></category>
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					<description><![CDATA[बिज़नेस स्मॉल (Small business) हो या बड़ा, उसे अच्छे से चलाने के लिए कई चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। सही कहते हैं कि बिज़नेस (Business) शुरू करने भर से ही बिज़नेस सफल (Successful business) नहीं होता है, बल्कि उसका सही तरीके से मैनेज़मेंट करना पड़ता है। बिज़नेस मैनेजमेंट (Business management) से मतलब बैंकिंग (Banking), [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-weight: 400;">बिज़नेस स्मॉल (Small business) हो या बड़ा, उसे अच्छे से चलाने के लिए कई चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। सही कहते हैं कि बिज़नेस (Business) शुरू करने भर से ही बिज़नेस सफल (Successful business) नहीं होता है, बल्कि उसका सही तरीके से मैनेज़मेंट करना पड़ता है। बिज़नेस मैनेजमेंट (Business management) से मतलब बैंकिंग (Banking), अकाउंटिंग (Accounting), एक्सपेंसेस (Expenses), कैशफ़्लो (Cashflow), इन्वेंटरी मैनेज़ (Inventory management) करने से है। अगर इन सभी चीजों पर बराबर ध्यान नहीं दिया गया, तो बिज़नेस (Business) के सफल होने की संभावना काफ़ी कम हो जाती है। जिस तरह से बिज़नेस के लिए बैंकिंग (Banking) ज़रूरी होती है, उसी तरह से इन्वेंटरी मैनेज़ (Inventory management) करना भी बहुत ज़रूरी होता है। आज हम इस ब्लॉग में बात करेंगे कि इन्वेंटरी क्या है (What is inventory?) और उसे आसानी से कैसे मैनेज़ (How to manage inventory easily) कर सकते हैं।</span></p>
<h3><b>इन्वेंटरी क्या है:</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">इन्वेंटरी (Inventory) का मतलब कच्चे माल (Raw material), बिक्री के लिए उपलब्ध आइटम्स (Items available for sale) और बिक्री के लिए तैयार होने वाले आइटम्स से है। आसान शब्दों में इन्वेंटरी को स्टॉक (Stock) भी कहा जा सकता है। किसी भी बिज़नेस की बैलेंस शीट (balance sheet) में इन्वेंटरी को संपत्ति (Asset) के रूप में माना जाता है, क्योंकि आइटम्स बिकने के बाद वह कैश (Cash) में बदल जाता है। इन्वेंटरी को मर्चेंडाइज (Merchandise) के रूप में भी माना जाता है, जो उन सामग्रियों और सामानों को कहते हैं, जिन्हें व्यवसायी भविष्य में अपने ग्राहकों को बेचने के लिए रखते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इससे साफ़ हो जाता है कि किसी भी बिज़नेस के लिए इन्वेंटरी (Inventory) कितनी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपका स्मॉल बिज़नेस (Small business) ठीक तरह से चलता रहे तो अब आपको बिज़नेस की इन्वेंटरी को मैनेज़ (Management of business inventory) करने पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए।</span></p>
<h3><b>बिज़नेस में इन्वेंटरी का महत्व:</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">किसी भी बिज़नेस के लिए इन्वेंटरी कितनी महत्वपूर्ण होती है (Importance of inventory for businesses), इसे हम एक साधारण से उदाहरण द्वारा समझने की कोशिश करते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">गुप्ता जी किराने की दुकान (Kirana shop) चलाते हैं और वह अपने सभी ग्राहकों (Customers) को हमेशा खुश रखने की कोशिश करते हैं। वह ग्राहकों की ज़रूरत का हर आइटम अपनी दुकान में रखते हैं। हालांकि, कई बार वह कुछ आइटम्स मंगाना भूल जाते हैं, जिसकी वजह से उनके ग्राहकों को ख़ाली हाथ वापस जाना पड़ता है। इसकी वजह से गुप्ता जी के बिज़नेस (Business) पर बुरा असर पड़ता है। वहीं, अगर गुप्ता जी दुकान की इन्वेंटरी (Inventory) पर ध्यान देते, तो शायद ऐसा नहीं होता। अगर वो इन्वेंटरी (Inventory) पर ध्यान देते तो उन्हें पता होता कि कौन-कौन से आइटम्स हैं और किन आइटम्स को ऑर्डर (Order) करने की ज़रूरत है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">यही वजह है कि इन्वेंटरी, स्मॉल बिज़नेस (Small business) से लेकर बड़े बिज़नेस (Evolved business) तक सबके लिए महत्वपूर्ण होती है। अगर इसका सही तरीके से मैनेज़मेंट नहीं किया गया तो बिज़नेस पर बुरा असर पड़ता है और ग्राहकों का भरोसा भी टूट जाता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इन्वेंटरी (Inventory) को मैनेज़ करने के लिए पर्चेज़ ऑर्डर (Purchase order) बनाए जाते हैं। आइए अब जानते हैं कि पर्चेज़ ऑर्डर (Purchase order) किसे कहते हैं और इन्वेंटरी (Inventory) के लिए यह क्यों उपयोगी है।</span></p>
<h3><b>पर्चेज़ ऑर्डर क्या है:</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">वेंडर (Vendor) से ऑर्डर किए जाने वाले आइटम्स की लिस्ट को पर्चेज़ ऑर्डर (Purchase order) कहते हैं। मान लीजिए गुप्ता जी किराने की दुकान के ख़त्म हो चुके आइटम्स जैसे दाल, तेल, चीनी, नामक, साबुन को ऑर्डर करने के लिए लिस्ट बनाते हैं। वह लिस्ट में आइटम्स के साथ ही उसकी मात्रा यानी क्वांटिटी भी लिखते हैं। गुप्ता जी की उस लिस्ट को पर्चेज़ ऑर्डर (Purchase order) कहा जा सकता है। क्योंकि गुप्ता जी इसी लिस्ट की सहायता से वेंडर (Vendor) के पास आइटम्स (Items) का ऑर्डर प्लेस करेंगे।</span></p>
<h3><b>पर्चेज़ ऑर्डर का इन्वेंटरी में उपयोग:</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">पर्चेज़ ऑर्डर (Purchase Order), इन्वेंटरी मैनेज़मेंट (Inventory management) का एक हिस्सा है। अगर आप अपने बिज़नेस की इन्वेंटरी (Inventory of business) को मैनेज़ करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए पर्चेज़ ऑर्डर (Purchase order) बनाना पड़ेगा। इसलिए हम कह सकते हैं कि पर्चेज़ ऑर्डर, इन्वेंटरी मैनेज़मेंट के लिए बहुत ज़्यादा उपयोगी होता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आज के तकनीकी युग (Technical era) में ज़्यादातर काम तकनीकी (Technology) की सहायता से होने लगे हैं। इससे गलती होने की संभावना भी काफ़ी कम हो जाती है। ऐसे में अगर आप अभी भी अपने बिज़नेस की इन्वेंटरी (Inventory) को मैनेज़ करने के लिए पेपर पर पर्चेज़ ऑर्डर (Purchase order) बनाते हैं, तो ऐसा करना भी बंद कर दें। आप OpenBook की मदद से अपने स्मार्टफ़ोन पर ही पर्चेज़ ऑर्डर (Purchase order) बनाकर वेंडर (Vendor) को उनके व्हाट्सऐप, SMS या ईमेल पर भेज सकते हैं और अपनी इन्वेंटरी को काफ़ी आसान बना सकते हैं। सबसे बड़ी बात आप OpenBook से ही तुरंत उसकी पेमेंट (Payment) भी कर सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आपको बता दें कि <a href="https://blog.openbook.co/hi/business-banking-made-simple/">OpenBook बिज़नेस को आसानी से मैनेज़ करने के लिए एक ऑनलाइन बैंक अकाउंट</a> (Online bank account) देता है। जिससे आप अपने बिज़नेस की बिलिंग, बैंकिंग, अकाउंटिंग और टैक्स सब कुछ एक जगह पर मैनेज़ कर सकते हैं। OpenBook आपको लो स्टॉक की जानकारी भी देता है, जिससे स्टॉक कम होने पर आप उसे आसानी से मैनेज़ कर सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">ऐसे में ज़्यादा इंतज़ार मत कीजिए। अपने बिज़नेस को मैनेज़ करने के लिए <a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=co.openbook" rel="nofollow noopener" target="_blank">OpenBook इस्तेमाल करें</a> और अपना #BusinessकरोSimple.</span></p>
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		<title>इस तरह अपने बिज़नेस को ऑनलाइन प्रमोट करें!</title>
		<link>https://blog.openbook.co/hi/how-to-promote-your-business-online-2/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[OpenBook]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Nov 2021 10:51:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MSME]]></category>
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					<description><![CDATA[बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च, 2021 तक भारत में इंटरनेट यूज़र्स (Internet users in india) की संख्या लगभग 82.53 करोड़ थी। जिस तरह से भारत में इंटरनेट यूज़र्स की संख्या बढ़ रही है। भारत में इंटरनेट यूज़र्स बढ़ने की वजह से वर्तमान में ज़्यादातर लोग ऑनलाइन शॉपिंग (Online shopping) करने लगे हैं। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-weight: 400;">बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च, 2021 तक भारत में इंटरनेट यूज़र्स (Internet users in india) की संख्या लगभग 82.53 करोड़ थी। जिस तरह से भारत में इंटरनेट यूज़र्स की संख्या बढ़ रही है। भारत में इंटरनेट यूज़र्स बढ़ने की वजह से वर्तमान में ज़्यादातर लोग ऑनलाइन शॉपिंग (Online shopping) करने लगे हैं। यह संख्या भविष्य में और भी बढ़ने वाली है। इसलिए आने वाला समय ऑनलाइन बिज़नेस (Online business) के लिए काफ़ी अच्छा होने वाला है। ऐसे में आपको अपने बिज़नेस को ऑनलाइन ले जाने के प्रॉसेस में लग जाना चाहिए।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आप भी जानते हैं कि 2020 में फैला कोरोना (Corona) महामारी का असर अभी भी कम नहीं हुआ है। लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से बड़े से लेकर स्मॉल बिज़नेस (Small business) सभी को काफ़ी नुक़सान हुआ। लॉकडाउन के दौरान ज़्यादातर बिज़नेस (Business) ऑनलाइन हो गए और ऑनलाइन सामान बेचने लगे। यहां तक कि छोटे-छोटे व्यापारियों ने भी अपना बिज़नेस ऑनलाइन (Business online) कर लिया है। ऐसे में अगर आपने अभी भी अपने बिज़नेस को ऑनलाइन नहीं किया है, तो अब अपने बिज़नेस (Business) को ऑनलाइन (Online) करने का समय आ गया है।</span></p>
<p><b>बिज़नेस को ऑनलाइन ले जाने से होने वाले फ़ायदे:</b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आज के तकनीकी युग (Technical era) में अपने बिज़नेस को ऑनलाइन ले जाने के कई फ़ायदे हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है।</span></p>
<ul>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">ऑनलाइन बिज़नेस (Online business) करने से आपके ग्राहकों (Customers) की संख्या बढ़ती है, क्योंकि आपका बिज़नेस (Business) किसी एक क्षेत्र (Region) तक सीमित नहीं रहता है।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">ऑनलाइन बिज़नेस (Online business) करने पर लॉकडाउन (Lockdown) या अन्य किसी बंदी के समय भी आप अपना बिज़नेस (Business) चला सकते हैं।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">बिज़नेस को ऑनलाइन ले जाने से उसकी इमेज में सुधार होता है।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">ऑनलाइन बिज़नेस (Online business) में समय की कोई पाबंदी (Time limit) नहीं होती है। इसलिए आप रात-दिन किसी भी समय अपना बिज़नेस चला सकते हैं।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">ऑनलाइन बिज़नेस (Online business) चलाने में ऑफ़लाइन बिज़नेस की तुलना में कम खर्च होता है।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">ऑनलाइन बिज़नेस (Online business) करने से आप देश के बाहर के ग्राहकों को भी सामान बेच सकते हैं।</span></li>
</ul>
<p><span style="font-weight: 400;">बिज़नेस (Business) को ऑनलाइन (Online) ले जाना ही बड़ी बात नहीं है। उसका प्रमोशन (Online business promotion) भी बहुत ज़रूरी है, क्योंकि बिना प्रमोशन के बिज़नेस को बड़े स्तर तक पहुंचा पाना मुश्किल है। इसलिए बिज़नेस को ऑनलाइन ले जाने के बाद उसके प्रमोशन (Promotion) को बिलकुल भी नहीं भूलना चाहिए।</span></p>
<p><b>बिज़नेस को ऑनलाइन ले जाने के तरीके:</b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अगर आप अपने बिज़नेस को ऑफ़लाइन (Offline) से ऑनलाइन (Online) ले जा रहे हैं, तो आपको कुछ तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए:</span></p>
<ul>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">बिज़नेस (Business) को ऑनलाइन (Online) ले जाने के लिए बिज़नेस की एक वेबसाइट (Website) बनाएं। आप वेबसाइट पर बिज़नेस और सर्विस की डिटेल्स (Service details) के साथ ही प्रोडक्ट की डिटेल्स (Product details) और उसकी प्राइस भी मेंशन कर सकते हैं।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">आप अपने बिज़नेस को अमेजन (Amazon) या फ़्लिपकार्ट (Flipkart) जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म (E-commerce platforms) की मदद से भी ऑनलाइन (Online) ले जा सकते हैं।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">आजकल आप फ़ेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) के माध्यम से भी अपने सामान बेच सकते हैं।</span></li>
</ul>
<p><b>बिज़नेस को ऑनलाइन प्रमोट करने के तरीके:</b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">वेबसाइट (Website) बनाने के बाद बारी आती है बिज़नेस के प्रमोशन (Business promotion) की। हालांकि, बिज़नेस ऑनलाइन (Online business) है, तो उसका प्रमोशन भी ऑनलाइन (Online promotion) ही होना चाहिए। इसलिए आप ये तरीके अपना सकते हैं:</span></p>
<ul>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">बिज़नेस को ऑनलाइन प्रमोट (Online business promotion) करने के लिए आप फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे सोशन मीडिया प्लेटफ़ॉर्म (Social media platforms) का इस्तेमाल कर सकते हैं।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">सोशल मीडिया (Social media) पर ग्राहकों से जुड़ें और उन्हें मौक़ा दें कि वो आपके प्रोडक्ट के बारे में अपने विचार रखें। इससे आपका और आपके ग्राहकों का रिश्ता (Customer relation) मज़बूत होगा और ग्राहकों का आपके ऊपर भरोसा भी बढ़ेगा।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">कई बार लोग फ़ोटो (Image) द्वारा भी प्रोडक्ट सर्च करते हैं। ऐसे में अपने प्रोडक्ट की क्लीयर फ़ोटो अपलोड (Upload photo) करें और सही तरह से SEO का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से आपकी वेबसाइट पर ऑर्गैनिक ट्रैफ़िक (Organic traffic) आएगा और बिज़नेस (Business) को फ़ायदा होगा।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">गूगल माई बिज़नेस (Google my business) के माध्यम से भी आप अपने बिज़नेस को ऑनलाइन प्रमोट (Online promotion) कर सकते हैं।</span></li>
</ul>
<p><span style="font-weight: 400;">बिज़नेस ऑनलाइन (Online business) हो या ऑफ़लाइन (Offline business), सबके लिए बैंकिंग (Banking), बिलिंग (Billing), अकाउंटिंग (Accounting) और टैक्स (Tax) को मैनेज़ करना ज़रूरी होता है। बिज़नेस ऑनलाइन (Business online) ले जाने के बाद आप इन सभी को एक साथ मैनेज़ करने के लिए OpenBook ऐप उपयोग कर सकते हैं। <a href="https://blog.openbook.co/hi/business-banking-made-simple/">OpenBook आपके स्मॉल बिज़नेस (Small business) के लिए एक ऑनलाइन बैंक अकाउंट (Online bank account) देता है</a>, जिससे कोई भी अपने बिज़नेस की हर बैंकिंग ज़रूरत (Banking needs) को पूरा कर सकता है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अब आप समझ गए होंगे कि आज के समय में अपने स्मॉल बिज़नेस को ऑनलाइन जे जाना क्यों ज़रूरी है। इसके साथ ही आपके ऑनलाइन बिज़नेस को आगे बढ़ाने में OpenBook आपकी कैसे मदद कर सकता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">ऐसे में आप अभी भी किसका इंतज़ार कर रहे हैं। आज ही <a href="https://bit.ly/OpenBookApp" rel="nofollow noopener" target="_blank">OpenBook ऐप</a> डाउनलोड कीजिए और अपने बिज़नेस को आगे बढ़ाइए।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">OpenBook से अपना </span><b><a href="https://openbook.co/" rel="nofollow noopener" target="_blank">#BusinessKaroSimple</a>.</b></p>
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		<title>OpenBook की मदद से आसानी से पेमेंट कलेक्ट करें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[OpenBook]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Sep 2021 10:28:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बैंकिंग]]></category>
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					<description><![CDATA[पेमेंट कलेक्शन (Payment Collection) किसी भी बिज़नेस (Business) की सबसे ज़रूरी चीज़ होती है। ऐसे में इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। गांव हो या शहर, हर जगह छोटे व्यापारी (Small Businessman) क्रेडिट (Credit) पर सामान देकर ग्राहक (Customer) बढ़ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बाद में पेमेंट कलेक्ट करने में उन्हें परेशानी होती [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-weight: 400;">पेमेंट कलेक्शन (Payment Collection) किसी भी बिज़नेस (Business) की सबसे ज़रूरी चीज़ होती है। ऐसे में इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। गांव हो या शहर, हर जगह छोटे व्यापारी (Small Businessman) क्रेडिट (Credit) पर सामान देकर ग्राहक (Customer) बढ़ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बाद में पेमेंट कलेक्ट करने में उन्हें परेशानी होती है। आज के डिजिटल युग (Digital Era) में ज़्यादातर व्यापारी पेमेंट कलेक्शन के लिए कई ऐप (App) और सॉफ़्टवेयर (Software) उपयोग कर रहे हैं, लेकिन फिर भी इस समस्या का पूरी तरह से समाधान नहीं हो पाया है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आज के समय में स्मॉल बिज़नेस (Small Business) हो या बड़ा बिज़नेस हर कोई पेमेंट कलेक्शन (Payment Collection) की समस्या का सामना कर रहा है।</span></p>
<h3><b>स्मॉल बिज़नेस के लिए समय पर पेमेंट कलेक्ट करना क्यों ज़रूरी है:</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">अगर आप व्यापारी (Businessman) हैं, तो आप अच्छे से जानते होंगे कि कोई भी बिज़नेस (Business) पैसों से ही चलता है। अगर बिज़नेस का कैशफ़्लो (Cash-flow) ख़राब हुआ, तो बिज़नेस को नुक़सान हो सकता है। ऐसे में बेचे गए सामान की समय पर पेमेंट (Payment) मिलना बहुत ज़रूरी है। इसके अलावा इन कारणों से भी स्मॉल बिज़नेस (Small Business) के लिए समय पर पेमेंट कलेक्ट करना बहुत ज़रूरी होता है।</span></p>
<ul>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">समय पर पेमेंट कलेक्ट करने से आप अपने बिज़नेस (Business) को अच्छे से आगे बढ़ा सकते हैं।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">समय पर पेमेंट कलेक्ट करने से आपके बिज़नेस का कैशफ़्लो (Cash-flow) सही रहता है।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">अगर आप अपने ग्राहकों से समय पर पेमेंट कलेक्ट करते हैं, तो आप अपनी इन्वेंटरी (Inventory) को भी अच्छे से मैनेज़ कर सकते हैं।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">अगर आप समय पर पेमेंट कलेक्ट कर लेते हैं, तो आप इस बात का सही हिसाब लगा सकते हैं कि आपके बिज़नेस को फ़ायदा हो रहा है या नहीं।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">अगर आपको अपने ग्राहकों से समय पर पेमेंट मिल जाती है, तो आपका ग्राहक के साथ अच्छा रिश्ता (Customer Relation) बना रहता है।</span></li>
</ul>
<p><b><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-323 size-large" src="https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2021/09/Online-payment1-1024x683.jpg" alt="OpenBook-Billing, Banking, Accounting, GST" width="1024" height="683" title="OpenBook की मदद से आसानी से पेमेंट कलेक्ट करें 5" srcset="https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2021/09/Online-payment1-1024x683.jpg 1024w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2021/09/Online-payment1-300x200.jpg 300w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2021/09/Online-payment1-768x512.jpg 768w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2021/09/Online-payment1-1536x1024.jpg 1536w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2021/09/Online-payment1-2048x1365.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></b></p>
<p>पेमेंट कलेक्शन(payment collection) के मामले में वर्तमान स्थिति:</p>
<p><span style="font-weight: 400;">आपने अक्सर देखा होगा कि ज़्यादातर दुकानों पर &#8220;आज नक़द, कल उधार&#8221; जैसी टैगलाइन लिखी होती है, उसके बाद भी ग्राहक क्रेडिट (Credit) पर सामान लेते हैं। व्यापारी और ग्राहक (Businessman and Customer) दोनों ऐसा करने के लिए मजबूर होते हैं। व्यापारी अपने ग्राहकों की संख्या बढ़ाने के लिए ऐसा करते हैं, वहीं ग्राहक पैसे की कमी की वजह से क्रेडिट पर सामान लेते हैं। क्रेडिट (Credit) पर सामान लेने के बाद कुछ ग्राहक समय पर पेमेंट (Payment on Time) कर देते हैं, जबकि कई ग्राहक पैसे देने में काफ़ी देर (Late Payment) करते हैं। ऐसे में व्यापारियों को काफ़ी परेशानी होती है। कुछ व्यापारी पेमेंट कलेक्ट करने के लिए ग्राहकों पर दबाव डालते हैं, जबकि कुछ व्यापारी संकोच की वजह से कुछ कह नहीं पाते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हालांकि, आज डिजिटलाइज़ेशन (Digitalization) की वजह से पेमेंट लिंक (Payment Link) भेजकर आसानी से ग्राहकों से पेमेंट कलेक्ट किया जा सकता है। इसके साथ ही आप ग्राहकों को पेमेंट के लिए रिमाइंडर्स (Payment Reminders) भी भेज सकते हैं।</span></p>
<h3><b>OpenBook से आसानी से पेमेंट कलेक्ट करें:</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">पेमेंट कलेक्शन(payment collection) के साथ ही स्मॉल बिज़नेस (Small Business) को होने वाली सामान्य समस्याओं को ध्यान में रखकर ही OpenBook ऐप को बनाया गया है। OpenBook की सहायता से अब हर व्यापारी आसानी से ग्राहकों से पेमेंट कलेक्ट कर सकते हैं। आइए जानें कैसे:</span></p>
<ul>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">आप आसानी से पेमेंट लिंक (Payment Link) के साथ इनवॉइस बनाकर अपने ग्राहकों को व्हाट्सऐप, SMS और ईमेल पर सेंड सकते हैं।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">पेमेंट लिंक (Payment Link) मिलते ही ग्राहक उस पर क्लिक करके अपनी पसंद के मोड जैसे UPI, NEFT, RTGS, IMPS से तुरंत पेमेंट कर सकते हैं।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">OpenBook से पेमेंट लिंक (Payment Link) सेंड करके आप अंतरराष्ट्रीय पेमेंट (International Payment)  भी कलेक्ट कर सकते हैं।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">जो ग्राहक पेमेंट करने में देर करें, आप उन्हें OpenBook से पेमेंट रिमाइंडर्स (Payment Reminders) भी भेज सकते हैं।</span></li>
</ul>
<p><span style="font-weight: 400;"><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-322 size-large" src="https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2021/09/Online-payment-1024x640.jpg" alt="OpenBook-Billing, Banking, Accounting, GST" width="1024" height="640" title="OpenBook की मदद से आसानी से पेमेंट कलेक्ट करें 6" srcset="https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2021/09/Online-payment-1024x640.jpg 1024w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2021/09/Online-payment-300x188.jpg 300w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2021/09/Online-payment-768x480.jpg 768w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2021/09/Online-payment-1536x960.jpg 1536w, https://blog.openbook.co/wp-content/uploads/2021/09/Online-payment-2048x1280.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /><br />
इस तरह आप OpenBook का उपयोग करके अपने ग्राहकों से आसानी से तुरंत पेमेंट कलेक्ट कर सकते हैं और अपने बिज़नेस (Business) को आगे बढ़ा सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इसके अलावा OpenBook का इस्तेमाल करके आप अपने <a href="https://blog.openbook.co/hi/%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b9-20-%e0%a4%98%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf/">बिज़नेस की बिलिंग (Billing), बैंकिंग (Banking), अकाउंटिंग (Accounting) और टैक्स (Tax-GST)</a> को आसानी से मैनेज़ कर सकते हैं। ये सभी ऐसी चीजें हैं, जो किसी भी बिज़नेस (Business) के लिए ज़रूरी होती हैं। इसलिए इनको अनदेखा नहीं किया जा सकता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अब तो आप जान गए कि OpenBook आपके स्मॉल बिज़नेस (Small Business) के लिए क्यों ज़रूरी है। ऐसे में इतंजार क्यों कर रहे हैं, आज ही<strong> <a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=co.openbook" rel="nofollow noopener" target="_blank">OpenBook</a> </strong>ऐप डाउनलोड कीजिए और अपने बिज़नेस (Business) को आसान बनाइए। OpenBook से <strong><a href="https://openbook.co/" rel="nofollow noopener" target="_blank">#BusinessकरोSimple</a></strong>.</span></p>
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